विश्व विख्यात तबला वादक जाकिर हुसैन का निधन, प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुःख
नई दिल्ली(एजेंसी)। विश्व विख्यात तबला वादक और पद्म विभूषण उस्ताद जाकिर हुसैन का निधन हो गया है। जाकिर हुसैन के निधन के बाद पूरे देश और दुनिया में शोक की लहर है। सोमवार सुबह अमेरिका में उनका निधन हो गया। जिस तबले की थाप ने दुनिया भर के श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया, वह अब हमेशा के लिए खामोश हो गई है। तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन के निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुख जताया। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा कि “महान तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन के निधन से बहुत दुख हुआ। उन्हें एक सच्चे प्रतिभाशाली व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में क्रांति ला दी। वे तबले को वैश्विक मंच पर भी लेकर आए और अपनी बेजोड़ लय से लाखों लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय परंपराओं को वैश्विक संगीत के साथ सहजता से मिश्रित किया। इसलिए वे सांस्कृतिक एकता के प्रतीक थे। उनके प्रतिष्ठित प्रदर्शन और भावपूर्ण रचनाएं संगीतकारों और संगीत प्रेमियों की पीढ़ियों को प्रेरित करने में योगदान देंगी। उनके परिवार, दोस्तों और वैश्विक संगीत समुदाय के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं।“
उनका जन्म 9 मार्च 1951 को मुंबई में हुआ था। उस्ताद जाकिर हुसैन को 1988 में पद्म श्री, 2002 में पद्म भूषण और 2023 में पद्म विभूषण से नवाजा गया था। उस्ताद जाकिर हुसैन महान तबला वादक उस्ताद अल्लाह रक्खा के बेटे हैं। इस प्रसिद्ध संगीतकार ने हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका में आयोजित 66वें ग्रैमी अवार्ड्स में तीन पुरस्कार जीते। उन्हें ‘पश्तो’ पर उनके काम के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ वैश्विक संगीत प्रदर्शन’ श्रेणी में प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला। इससे पहले, उस्ताद जाकिर हुसैन ने बेला फ्लेक, एडगर मेयर और राकेश चौरसिया के साथ मिलकर ‘एज वी स्पीक’ इंडिया टूर की घोषणा की थी। जनवरी 2025 में होने वाला यह टूर विविध संगीत प्रभावों के मिश्रण से दर्शकों को लुभाने का वादा करता है। ये सभी ग्रैमी पुरस्कार विजेता उत्कृष्ट कलाकार सामूहिक रूप से 31 प्रतिष्ठित पुरस्कारों का दावा करते हैं, जिनमें से दो उनके 2023 एल्बम ऐज वी स्पीक के लिए हैं।
आखिरी दिनों की कहानी
जाकिर हुसैन पिछले कुछ समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। दिल से जुड़ी जटिलताओं के चलते उन्हें अमेरिका के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की पूरी कोशिशों के बावजूद, 15 दिसंबर 2024 को यह महान कलाकार इस दुनिया को अलविदा कह गया। उनके निधन ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में उनके चाहने वालों को गहरा आघात दिया।
बचपन से संगीत का जुनून
जाकिर हुसैन का जन्म 9 मार्च 1951 को मुंबई में हुआ था। संगीत उनके खून में था। उनके पिता, उस्ताद अल्ला रक्खा, खुद एक महान तबला वादक थे। बचपन से ही जाकिर ने अपने पिता से तबले की बारीकियां सीखनी शुरू कर दी थीं। उन्होंने अपनी कला में इतना अभ्यास और परिश्रम किया कि जल्द ही उनकी प्रतिभा उभरकर सामने आई। जाकिर हुसैन का नाम तबला वादन का पर्याय बन गया। उनकी उंगलियां जब तबले पर पड़तीं, तो श्रोता उनकी धुनों में खो जाते। जाकिर ने केवल भारतीय संगीत को ही नहीं, बल्कि विश्व संगीत को भी अपनी अद्भुत प्रतिभा से समृद्ध किया।।
संगीत की दुनिया में बेमिसाल योगदान
जाकिर हुसैन केवल एक संगीतकार नहीं थे; वह भारतीय शास्त्रीय संगीत के राजदूत थे। उन्होंने तबले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग पहचान दिलाई। उन्होंने न सिर्फ भारतीय शास्त्रीय संगीत में योगदान दिया, बल्कि जैज़ और वर्ल्ड म्यूज़िक के साथ भी अपने तालमेल से संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। जाकिर हुसैन ने अपने जीवनकाल में सैकड़ों मंचीय प्रदर्शन किए और हर बार अपनी ऊर्जा और करिश्मे से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी कला का जादू ऐसा था कि उनका हर प्रदर्शन एक नया अनुभव होता।
फिल्मों और पुरस्कारों की दुनिया
जाकिर हुसैन ने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में भी अपनी प्रतिभा का जलवा बिखेरा। उन्होंने कई फिल्मों में बैकग्राउंड स्कोर तैयार किया और अपनी कला से सिनेमा को भी समृद्ध किया। उनके योगदान को देश और दुनिया ने कई बार सराहा। उन्हें पद्म श्री (1988) और पद्म भूषण (2002) जैसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान प्राप्त हुए। इसके अलावा, उन्होंने ग्रैमी अवॉर्ड भी जीता, जो उनकी कला के अंतरराष्ट्रीय मान्यता का प्रतीक है।
एक संपूर्ण युग का अंत
जाकिर हुसैन के निधन की खबर ने भारतीय संगीत जगत को हिला कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर उनके चाहने वाले, साथी कलाकार और दुनिया भर के संगीत प्रेमी उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।उनके निधन से भारतीय शास्त्रीय संगीत ने न केवल एक कलाकार खो दिया है, बल्कि एक संपूर्ण युग का अंत हो गया है। जाकिर हुसैन ने जो विरासत छोड़ी है, वह संगीत प्रेमियों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेगी।
प्रेरणा का स्रोत
जाकिर हुसैन का जीवन उन सभी के लिए प्रेरणा है जो कला और संगीत के प्रति समर्पित हैं। उन्होंने यह सिखाया कि अगर कला और मेहनत के प्रति सच्चा समर्पण हो, तो कोई भी आपको दुनिया के हर कोने में पहचान दिला सकता है। उनकी कला न केवल भारत की, बल्कि पूरे विश्व की धरोहर है। उनके जाने से भले ही तबले की थाप थोड़ी खामोश हो गई हो, लेकिन उनकी धुनें हमेशा गूंजती रहेंगी। जाकिर हुसैन की कला, उनका जीवन और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रकाश स्तंभ की तरह रहेगा।
संगीत प्रेमियों के दिलों में जिंदा रहेंगे जाकिर हुसैन
तबले की थाप को जादुई बनाने वाले उस्ताद जाकिर हुसैन ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। लेकिन उनका संगीत, उनकी धुनें और उनकी प्रेरणा हमेशा हमारे दिलों में अमर रहेंगी। उनके जाने से जो शून्य पैदा हुआ है, उसे भर पाना असंभव है। उनकी विरासत हमें यह याद दिलाती रहेगी कि कला और संगीत की शक्ति सीमाओं, धर्मों और भाषाओं से परे होती है। जाकिर हुसैन, आप भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच न हों, लेकिन आपकी थाप और आपका संगीत हमेशा हमारे साथ रहेगा।
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