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महिलाओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए:

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गलत सिस्टम से भागना नहीं, लड़ना सीखें – मैमूना नरगिस

डॉ. नुसरत का नौकरी छोड़ने का फैसला ‘कमजोर’, मुक्काबला करना ही असली बहादुरी

जयपुर (रॉयल पत्रिका)। प्रसिद्ध सोशल एक्टिविस्ट और आर्ट कंज़र्वेटर मैमूना नरगिस ने महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध और हाल ही में डॉ. नुसरत के मामले पर अपनी बेबाक राय रखी है। उन्होंने कहा कि परेशानियों का हल निकालने के बजाय राह बदल लेना कायरता है। मैंने खुद हमेशा चैलेंज का मुक़ाबला किया है और हर महिला को मेरी यही सलाह है कि भागना या छोड़ना मसले का हल नहीं है।

चुनौती स्वीकार करें, गुंडों को सबक सिखाएं

मैमूना नरगिस ने कहा कि उस ग़लती और गुनाह को सुधारने का चैलेंज लो। तभी महिलाओं को लेकर गुंडों, मवालियों और औरत को ‘टाइम पास’ समझने वालों को सबक़ सिखाया जा सकेगा।

  • हिंदुस्तान में आजकल यह आम होता जा रहा है।

  • समाज, मीडिया और खुद औरत ने भी औरत को बहुत सस्ता बना दिया है।

  • कड़वा सच यही है कि हिंदुस्तान की काफ़ी हद तक महिलाएं घरों, ऑफिसों और पड़ोस में बेइज़्ज़ती और हैरेसमेंट का शिकार होती हैं।

डरपोक न बनें, आवाज उठाएं

उन्होंने पैरेंटिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि लड़कियों को घर में ही मर्द ज़ात और समाज को ऐसा ‘हव्वा’ बनाकर पेश किया जाता है कि लड़कियां मुक़ाबला तो दूर, अपने घर वालों को बता भी नहीं पातीं।

  • गलत परवरिश: जहाँ ख़ामोशी बेहतरीन अमल है, वहां हम उनको आवाज़ उठाना सिखाते हैं और जहाँ आवाज़ उठाना ज़रूरी है, वहां हम उनको समाज और बदनामी का डर दिखाकर कमज़ोर बनाते हैं।

  • सीख: लड़कियों को सिखाएं कि कहीं गलत हो तो खामोश मत बैठो। आवाज उठाओ, अपने लिए भी और तुम्हारे बाद आने वाली और लड़कियों के लिए भी।

नौकरी छोड़ना समस्या का हल नहीं

मैमूना नरगिस ने डॉ. नुसरत के फैसले पर असहमति जताते हुए कहा:

“मेरी नज़र में डॉ. नुसरत का फैसला नौकरी छोड़ने का एक कमज़ोर और हालात से भागने वाला फैसला है। डॉक्टर बनना और पेरेंट्स का औलाद को डॉक्टर बनाना आसान काम नहीं है। इसमें दिन-रात की मेहनत और जिंदगी भर की कमाई लगती है।”

उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में मुसलमानों को वैसे भी रोज़गार में ख़ास जगह नहीं मिल रही है। यह नौकरी आपकी योग्यता और शिक्षा ने दिलाई है, यह किसी की जागीर नहीं थी। नौकरी छोड़कर आप सरकार या नेताओं का नहीं, अपना नुकसान कर रही हैं।

कर्नाटक की छात्रा से लें सीख

उन्होंने कहा कि हमें कर्नाटक की उस हिजाब वाली लड़की (मुस्कान) से सीखना चाहिए, जो भीड़ के सामने न झुकी, न डरी और न ही अपना हिजाब खींचने दिया।

  • सिस्टम से लड़ें: गलत सिस्टम से भागने में बहादुरी नहीं, उसका सामना करने में है।

  • जगह मत बदलो: अगर आप सीट खाली करेंगी, तो कोई और आकर बैठ जाएगा। नौकरी छोड़ने से सिस्टम नहीं सुधरेगा।

  • सबक सिखाओ: कहीं भी आपका सीनियर या सहपाठी ग़लत व्यवहार करे, तो जगह मत बदलो, बल्कि उसको सबक़ सिखाओ और सिस्टम को चुनौती दो।

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