Loading...

क्या इण्डिया गठबंधन ईवीएम से चुनाव के विरोध में अभियान चलाएगा ?

Jaipur

Follow us

Share

जयपुर(रॉयल पत्रिका)। इण्डिया गठबंनध मे शामिल पार्टियां महाराष्ट्र गठबंधन के बाद कमजोर दिखाई देने लगी हैं। गठबंधन के नेता एक दूसरे के खिलाफ बयान दे रहे है। महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी ने शिवसेना (उद्धव) का विरोध करते हुए इण्डिया गठबंधन छोड दिया है। ममता बनर्जी ने इण्डिया गठबंधन का नेतृत्व करने की इच्छा व्यक्त की है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नेतृत्व करने की बात कहना एक तरह से कांग्रेस का विरोध करना है। लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीट पर रोकना और बहुमत से दूर रखने वाला इण्डिया गठबंधन आपसी खींचतान और कांग्रेस के स्वार्थ के कारण बिखरने लगा है। कांग्रेस ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी से गठबंधन नही करके गठबंधन को कमजोर करने की शुरूआत की थी। आम आदमी पार्टी की दिल्ली और पंजाब में सरकारें है और हरियाणा में निचले स्तर तक मजबूत पार्टी संगठन हैं। आम आदमी पार्टी हरियाणा में कांग्रेस से गठबंधन करना चाहती थी लेकिन कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी से गठबंधन को काई तरजीह नही दी थी। इसी तरह कांग्रेस ने विधानसभा उपचुनावों में भी गठबंधन की पार्टीयों को कोई तरजीह नही दी। महाराष्ट्र में इण्डिया गठबंधन के लिए अच्छा माहौल था और इण्डिया गठबंधन विधानसभा चुनाव जीतने को लेकर निश्चिंत था। लेकिन विधानसभा परिणाम इण्डिया गठबंधन के लिए अकल्पनीय थे। महाराष्ट्र की हार के लिए इण्डिया गठबंधन अब ईवीएम को जिम्मेदार मानकर चल रहा है। क्योंकि महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव का माहौल भाजपा के खिलाफ था, फिर भी दोनो राज्यों में भाजपा ने अप्रत्याशित जीत हासिल की थी।

– ईवीएम के खिलाफ आन्दोलन क्यों ?

इण्डिया गठबंधन के नेताओं और पार्टियों के बीच कितना भी विरोधाभास क्यों न हो लेकिन उनके लिए गठबंधन में रहने में ही भलाई है। गठबंधन के नेता मानते है कि उनकी पार्टिया तब तक चुनाव नही जीत सकती है जब तक चुनाव ईवीइम से होते रहेंगें। हरियाणा में किसान, मजदूर, पहलवान, महिलाऐं, दलित एवं अल्पसंख्यक आदि ज्यादातर वर्ग भाजपा से नाराज दिखाई दे रहे थे। फिर भी भाजपा ने बम्पर जीत हासिल की थी। इसलिए इण्डिया गठबंधन के नेता जरूरी समझने लगे है कि जब तक बैलेट पेपरों से चुनाव नहीं होंगे तब तक उनकी राजनीति गर्दिश में रहने वाली है। उनका यह भी मानना है कि चुनाव आयोग सत्तापक्ष के लिए एक तरफा झुकाव रखता है। सैकड़ों शिकायतें के बाद भी चुनाव आयोग निष्पक्ष सुनवाई नही कर सका है। विपक्षी पार्टियों और विपक्षी नेताओं को अपना अस्तित्व अब बैलेट पेपर से चुनाव होने मे ही नजर आ रहा है। इसलिए संभावना है कि इण्डिया गठबंधन के घटक दलो के नेता ईवीएम के खिलाफ एक बड़ा आन्दोलन कर सकता है। वैसे मजबूत लोकतंत्र के लिए बैलेट पेपर से चुनाव करवाना ठीक भी रहेगा। क्योंकि जिन देशो में ईवीएम से चुनाव की शुरूआत हुई थी, वहां अब बैलेट पेपर से ही चुनाव होते है। देश का चुनाव आयोग और सत्ताधारी पार्टी ईवीएम से ही चुनाव करवाना चाहेंगी। यही कारण है कि निकट भविष्य में पक्ष एवं विपक्षी पार्टियो में टकराव देखने को मिल सकता है।

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।