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आई लव मोहम्मद (स. अ.) नारे पर आपत्ति क्यों

जयपुर

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-क्या भाजपा के लिए यह राजनीतिक मुद्दा बन सकता है?

जयपुर (रॉयल पत्रिका)। उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से शुरू हुआ धार्मिक नारा अब उत्तर प्रदेश सरकार के लिए राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आई लव मोहम्मद (स. अ.) लिखे बैनर, पोस्टर लेकर चलने वालों पर एफआईआर दर्ज करना शुरू कर दिया है।  कानपुर, मुरादाबाद, बरेली में आई लव मोहम्मद (स. अ.) लिखे पोस्टर, बैनर लेकर चलने वालों पर बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज की गई है और बैनर, जुलूस लेकर रैली निकालने वालों पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने लाठी चार्ज किया और गिरफ्तारियां की है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस धार्मिक नारे को पूरी तरह दो समुदायों के बीच धार्मिक और राजनीति का मामला बना दिया है। आई लव मोहम्मद (स. अ.) नारे को लेकर माहौल गर्म होता जा रहा है।  बरेली में मौलाना तौकीर रजा सहित 2000 लोगों पर एफआईआर दर्ज किया गया।  धार्मिक मुद्दे का मामला अब उत्तर प्रदेश से निकलकर बिहार, उत्तराखंड एवं मध्य प्रदेश तक पहुंचता नजर आ रहा है। आई लव मोहम्मद (स. अ.) नारे का समर्थन एम आई एम सुप्रीमों असासुद्दीन ओवैसी, भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने किया है।  केंद्र की भाजपा सरकार ने इस मामले पर अभी तक अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है।  जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने इस मामले को पूरी तरह कानून व्यवस्था से जोड़कर प्रदर्शनकारियों पर कार्यवाही  कर रहे हैं।  मुस्लिम राजनीतिज्ञों  का कहना है कि मोहम्मद (स. अ.) से दुनिया का हर मुसलमान मोहब्बत करता है और दिलों से हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को नहीं निकाल  सकता है लेकिन मुसलमानों को सड़कों पर उतर कर कानून व्यवस्था का उल्लंघन नहीं करना चाहिए।

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