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एसआईआर पर विरोध क्यों बढ़ता जा रहा है? चुनाव आयोग और सरकार कटघरे में

जयपुर

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एसआईआर और उससे जुड़ी परेशानियां

देश में चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया करवाई जा रही है। इसके चलते हालात चिंताजनक हो गए हैं। खबरों के मुताबिक, देश में दर्जनों बीएलओ (BLO) की काम की अधिकता के कारण जान चली गई है। देश की जनता अपने सभी काम-धंधा छोड़कर सिर्फ एसआईआर के फॉर्म भरने में लगी है। मजदूर, किसान और कम पढ़े-लिखे लोग एसआईआर फॉर्म भरने में भारी परेशानी महसूस कर रहे हैं।

2002 की मतदाता सूची की शर्त और नागरिकता का डर

एसआईआर में 2002 की मतदाता सूची में स्वयं का या माता-पिता का नाम होना जरूरी माना गया है। नियम के अनुसार, यदि ऐसा नहीं है तो उस व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में से काट दिया जाएगा। चाहे उसके पास कितने भी दस्तावेज हों जो उसकी नागरिकता सिद्ध करते हों, उन्हें मान्य नहीं किया जाएगा।

बिहार और पीढ़ियों से रह रहे लोगों पर संकट

बिहार में लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। वर्तमान में देश के लोगों के दिमाग में नागरिकता को लेकर एक डर बैठ गया है। यदि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम नहीं है, तो उसे देश का नागरिक नहीं माना जाएगा। जो लोग पीढ़ियों से देश में रह रहे हैं, व्यवसाय कर रहे हैं, जिनके स्वयं के मकान और जमीन हैं, फिर भी उनका नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो उनकी नागरिकता पर सवाल उठ रहे हैं। यह जनता के लिए अजीब और मुश्किल स्थिति बन गई है।

विपक्ष के गंभीर आरोप: लोकतंत्र के लिए खतरा?

देश के विपक्षी दल भाजपानीत केंद्र सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि एसआईआर विपक्षी पार्टियों और विरोधी विचारधारा के लोगों के नाम मतदाता सूचियों से हटाने का एक तरीका है। विपक्ष का कहना है कि यदि एसआईआर वर्तमान चुनाव आयोग के अनुसार होती गई, तो देश में विपक्ष इतना कमजोर हो जाएगा कि सरकार को कोई खतरा ही नहीं रहेगा।

चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल

विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग सरकार के पक्ष में काम कर रहा है और भाजपा को जिताने के लिए एक एजेंसी की तरह व्यवहार कर रहा है। इसे भाजपा विरोधी मतदाताओं को हटाने का हथकंडा माना जा रहा है।

ईवीएम और निष्पक्ष चुनाव पर संदेह

केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर ऐसे तरीके लाने का आरोप है जो लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। विपक्ष पहले भी भाजपा सरकार पर मतदाता सूचियों और ईवीएम में हेरा-फेरी का आरोप लगा चुका है। विपक्ष का कहना है कि:

  • ईवीएम से चुनाव अब देश में निष्पक्ष और साफ-सुथरा नहीं माना जाता है।

  • एकमात्र भारत देश में ही ईवीएम से चुनाव होता है, जबकि जिन देशों ने ईवीएम को बनाया वहां अब बैलेट पेपर से चुनाव करवाए जा रहे हैं।

  • आशंका है कि इलेक्ट्रॉनिक मशीन को किसी पक्ष में या मंशा अनुसार हैक किया जा सकता है।

मामला सुप्रीम कोर्ट में और बढ़ता विरोध

चुनाव आयोग विपक्षी दलों के किसी विरोध और सवालों का जवाब नहीं देना चाहता है, जिसके चलते मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इन सभी कारणों से विपक्षी पार्टियां देश में एसआईआर और ईवीएम का विरोध करने लगी हैं और एसआईआर के खिलाफ यह विरोध दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है।

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