मोदी के बाद भाजपा में प्रधानमंत्री का दावेदार कौन हो सकता है?
गृहमंत्री अमितशाह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्वसरमा के नाम प्रधानमंत्री दावेदारों में प्रमुखता से लिए जा सकते हैं
एम खान
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीसरा कार्यकाल में वैसे तो करीब 4 वर्ष बचे हैं लेकिन फिर भी चर्चा होती रहती है कि भाजपा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद अगला प्रधानमंत्री का दावेदार कौन हो सकता है। 75 वर्ष पूरे कर चुके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कद का अभी तक भाजपा में एक भी नेता दिखाई नहीं दे रहा है जो पार्टी में सभी को स्वीकार है। भाजपा संगठन, भाजपा के पैतर्क संगठन आरएसएस के पास प्रधानमंत्री मोदी के कद का एक भी नेता नहीं दिखाई देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर वर्तमान घरेलू और विदेश नीति को लेकर बड़ा दबाव है। मोदी के कार्यकाल में सबसे घनिष्ठ संबंध अमेरिका और इजराइल से बने थे। अमेरिका ने अब भारत के विरोध रुख इख्तियार कर लिया है और इजराइल 2 वर्षों से लगातार युद्धों के कारण बर्बादी के कगार पर खड़ा हुआ है। चीन, पाकिस्तान की दोस्ती है इसलिए चीन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। यूरोपीय देश हमेशा अपने व्यापारिक हित देखते हैं। इजरायल की दोस्ती के कारण मुस्लिम देशों की भारत से दूरी बढ़ी है। घरेलू मोर्चे पर भी काफी दबाव दिखाई दे रहा है। गिरती विकास दर, बढ़ती युवाओं में बेरोजगारी और बढ़ता भ्रष्टाचार सरकार की परेशानी बढ़ा रहा है। इसके अलावा विपक्ष के कांग्रेस नेता राहुल गांधी चुनाव आयोग को लेकर नये-नये खुलासे करते जा रहे हैं जो भाजपानीत केंद्र सरकार की परेशानी बढ़ा रहे हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि बदलाव की संभावना देखी जा सकती है।
प्रधानमंत्री पद की दावेदारी-
भाजपा में प्रधानमंत्री कौन बनेगा दो बातों पर निर्भर रहेगा। पहले भाजपा सांसदों का समर्थन और आरएसएस की इच्छा। मोदी के बाद प्रधानमंत्री पद के दावेदारी में तीन नाम मुख्यरूप से लिए जा सकते हैं उनमें है गृहमंत्री अमित शाह, परिवहन एवं सड़क मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के फायर ब्रोड नेता योगी आदित्यनाथ। सबसे पहले प्रधानमंत्री पद की दावेदारी गृहमंत्री अमित शाह की बनती है। क्योंकि अमित शाह में गजब की संघठनात्मक एवं प्रशासनिक क्षमता है। भाजपा को मजबूत करने में अमित शाह का बड़ा योगदान है। गृहमंत्री अमित शाह की मजबूत पकड़ के कारण ही नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बन सके हैं और अभी भी कोई परेशानी नहीं है। अमित शाह आरएसएस की हिंदूत्व की इच्छा को भी पूरा करते हैं और सांसदों पर एवं सरकार में भी मजबूत पकड़ है। यदि आरएसएस थोड़ा लिबरल नेता एवं विकास की बात करने वाला नेता पसंद करती है तो नितिन गडकरी को प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है। नितिन गडकरी की सांसदों और संगठन पर पकड़ नहीं के बराबर है। इसी तरह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम भी उनके चाहने वाले प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताते रहते हैं। लेकिन योगी आदित्यनाथ केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित है और मनमानी और जल्दी निर्णय करने के कारण प्रधानमंत्री पद उनसे दूर लगता है। उनमें लोग कट्टर हिंदूत्व एवं मुस्लिम विरोधी की छवि देखते हैं। हिंदू राष्ट्र जल्दी बनाने के लिए योगी आदित्यनाथ उपयुक्त नेता हैं। असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्वसरमा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी भी हिंदूत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाने वाले मुख्यमंत्री हैं। दोनों ही मुस्लिम विरोधी छवि के कारण चर्चा में रहते हैं। दोनों मुख्यमंत्री बुलडोजर का प्रयोग मस्जिदों, मजारों में कई बार कर चुके हैं। इसके बाद भी कहा जा सकता है कि इनका प्रधानमंत्री बनाना इतना आसान नहीं है। दोनों ही अपने-अपने राज्यों तक सीमित है।
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