भाजपा की बी टीम कौनसा राजनीतिक दल है ?
एमआईएम, बसपा के बाद अब कांग्रेस पर लगे भाजपा को जिताने के आरोप
मुन्ना खान
जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। राजनीति में कौन किसका हितैषी है और कौन किसका दुश्मन है यह आसानी से पता नहीं चल पाता है। क्योंकि ज्यादातर पार्टियों ऐसा आभास करवाती हैं कि वह मजबूती से चुनाव में है और जीत कर जनता की खिदमत करेगी। देश की राजनीति में अब एक चलन चलने लगा है कि यदि स्वयं जीत नहीं सकते हैं तो दूसरी किसी पार्टी को हरा दिया जाए, जिससे भविष्य में उसको राजनीति में फायदा मिल सके। शुरुआत में भाजपा ने कांग्रेस को हराने के लिए विभिन्न क्षेत्रीय दलों का पीछे रहकर सपोर्ट किया। जिससे कांग्रेस को कमजोर किया जा सके। क्योंकि भाजपा में उस समय इतनी ताकत नहीं थी जो कांग्रेस पार्टी को चुनाव में सामने आकर हरा दे। नतीजन कांग्रेस विभिन्न राज्यों में कमजोर होने लगी और जब तक काँग्रेस की समझ में आया तब तक वह केंद्रीय सत्ता से बाहर हो गई। लंबे समय तक शासन करने के कारण उसके नेता और कार्यकर्ता खुदगर्ज, भ्रष्ट एवं आलसी हो गए। इसलिए कांग्रेस जमीन पर कमजोर पार्टी बन गई। इसी तरह उत्तर प्रदेश में तीन बार सत्ता में रही बसपा किसी न किसी पार्टी से गठबंधन करके सत्ता में आती रही। बसपा का वोट बैंक दलित और मुस्लिम समुदाय बन गया। लेकिन बसपा अपने वोट बैंक को संभाल नहीं पाई और चुनाव में हारने लगी। जब बसपा को लगा कि वह चुनाव में जीत नहीं सकती है तो उसने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को हराने के लिए अभियान करीब करीब सभी चुनाव में चलाया। जिसका भाजपा को बड़ा फायदा मिला। बसपा दूसरे दलों को हराने वाली पार्टी बन गई। धीरे-धीरे उसकी ऐसी हालत होने लगी कि वह जीत तो नहीं सकती है लेकिन किसी को हराने के काबिल भी नहीं रही। इस सब के बाद भी बसपा नेतृत्व एवं संगठन में बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।
इसी तरह एआईएमआईएम पार्टी के अध्यक्ष सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने किया। एआईएमआईएम पार्टी को कांग्रेस पार्टी,सपा ,बसपा तृणमूल कॉंग्रेस, रांकापा और आम आदमी पार्टी नेता भाजपा की बी टीम कह कर प्रचारित करती है, क्योंकि भाजपा के दर्जनों उम्मीदवार विधानसभाओं और लोकसभा में एआईएमआईएम पार्टी के उम्मीदवारों के कारण चुनाव जीत जाते हैं। वैसे इस बात के कोई सबूत तो नहीं है कि भाजपा और ओवैसी के बीच छुपा हुआ तालमेल है लेकिन ओवैसी की पार्टी के कारण भाजपा को फायदा जरूर मिल जाता है। सांसद ओवैसी सेक्यूलर दलों से हमेशा नाराज रहते हैं। उनका नाराज रहना सही भी हो सकता है क्योंकि कोई भी सेक्यूलर दल सांसद ओवेसी की पार्टी से चुनाव में गठबंधन नहीं करता है और ओवैसी उन दलों के उम्मीदवारों को मुस्लिम वोटो में बंटवारा करके हरवाते हैं। यही काम हरियाणा विधानसभा में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को हरवा कर किया था। देश में और कई उदाहरण भी हैं जिनके कारण कई राजनीतिक दल स्वयं नहीं जीतते हैं। लेकिन दूसरे दल को जरूर हरवा देते हैं। लेकिन एक बात आम है कि विपक्षी दलों में आपसी फूट का फायदा भाजपा को ही मिलता है और मिलता रहेगा। क्योंकि भाजपा अब देश की मजबूत, संघठित और एक्टिव कार्यकर्ताओं की पार्टी है। यदि ऐसा ही चलता रहा तो भाजपा देश में 50 वर्षों तक और शासन कर सकती है। भाजपा के बड़े लीडर और गृह मंत्री अमित शाह कई बार कह भी चुके हैं कि भाजपा 50 वर्ष तक देश से कही जाने वाली नहीं है। अब यह सवाल है कि भाजपा की बी टीम कौन सी पार्टी है? इसका जवाब यही हो सकता है कि विपक्ष के ज्यादातर राजनीतिक दल जाने अनजाने में भाजपा की बी टीम है।
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