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जो हो रहा है होता रहे हमको क्या करना है!  

Jaipur

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  • इसी सोच के चलते जयपुर का घनी मुस्लिम आबादी वाला क्षेत्र रहने के हिसाब से मुश्किल होता जा रहा है।
  • क्षेत्र में चाय, किराना और ठेलों पर नशा बिक रहा है, युवा नशेड़ी हो रहे हैं, सड़कों और सरकारी जगहों पर अतिक्रमण करके मकान दुकान बनाए जा रहें, देर रात तक आवारा युवाएं गाड़ियों को दौड़ाकर हो हल्ला करते हैं, बोर्ड की परीक्षाएं चलने के बावजूद देर रात तक गली मोहल्लों में शोर दिखाई दे रहा है, पुलिस से या दूसरे सरकारी विभाग में शिकायत यह सोचकर नहीं की जाति की हमको किसी का बुरा नहीं बनना है जो हो रहा है होता रहे हमको क्या करना हैं।

जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। जयपुर के मुस्लिम बाहुल्य घनी आबादी वाले क्षेत्रों में लोगों के लिए शांति से रहना, छात्र-छात्राओं को बोर्ड परीक्षा चलने के बावजूद शांति से पढ़ना आसान नहीं है। क्षेत्र में देर रात तक किराना, पान एवं चाय की दुकानें खुलती है। कहने के लिए इन पर किराना वस्तुएं, चाय एवं पान मिलते हैं लेकिन इनकी आड़ में नशा धड़ल्ले से बेचा जाता है। नियमों के अनुसार आबादी क्षेत्र एवं बाजारों में दुकान रात 10:00 बजे के बाद नहीं खोली जा सकती है लेकिन क्षेत्र में देर रात तक दुकाने खुली रहती है। इस चाय, पान एवं किराना  की दुकानों पर रात में भी सिगरेट के छल्ले उड़ाते युवा आसानी से बड़ी तादाद में मिल जाते हैं। पुलिस प्रशासन बिना शिकायत कार्यवाही नहीं करता है। शिकायत के बाद भी एक-दो दिन दुकान बंद रखते हैं और फिर देर रात तक खोलने लग जाते हैं। फिर कोई पुलिस वाले बंद नहीं करवाने आते। घनी आबादी में बड़ी संख्या में लोग इस समस्या से परेशान है।  फिर भी हो हल्ला, नशेड़ियों, बदमाशों एवं लफंगों को दुकानों पर नशा करता देखना अपनी आदत बना लिया है। बुरी आदतों, बुरी बातों एवं बुरा देखकर भी विरोध नहीं किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में रहना लोगों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। बच्चों की पढ़ाई का एवं अच्छे व्यवसाय का माहौल तो बिल्कुल नहीं है। मुस्लिम लीडर्स, राजनीतिक कार्यकर्ता एवं समाज सेवी, सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं। कुछ लोग क्षेत्र में मकान बेचकर बाहरी क्षेत्रों में बच्चों के अच्छी पढ़ाई के लिए जा रहे हैं।

  • सरकारी जमीनों पर कब्जें –

सरकारी जमीनों पर कब्जों का मामला केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं है। दूसरे समुदाय भी सरकारी जमीनों पर कब्जे करने में कहीं भी पीछे नहीं है। लेकिन मुस्लिम क्षेत्रों में छोटी-छोटी, सकड़ी गलियां होने के बावजूद अतिक्रमण करके मकान दुकान बनाना एक फैशन बन गया है। यही कारण है कि जयपुर के चारदिवारी के आबादी क्षेत्र में कोई भी चौक, सवील, मैदान, चौड़ी सड़क, गलियां बिना अतिक्रमण के नहीं बची है। अतिक्रमियों के हौंसले इतने बुलंद है कि उन्होंने स्कूल, हॉस्पिटल आदि पर कब्जा करने से भी परहेज नहीं किया। वर्तमान में भ्रष्ट प्रशासन और राजनीति के कारण सबने चुप्पी साध रखी है। सभी ने यही सोच रखा है कि जो बोलेगा वही फंसेगा।  कोई सच बोलने और विरोध करने के लिए तैयार नहीं है। ऐसा लगने लगा है कि वर्तमान में सच केवल एआई ही बोल सकता है इंसान नहीं।

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