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हमें अंतर्राष्ट्रीय सांप्रदायिक शक्तियों की साज़िशों को समझना होगा: हाफ़िज़ मंज़ूर

जयपुर

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शिया-सुन्नी विवाद नहीं, यह वैश्विक साज़िश है

जयपुर (रॉयल पत्रिका)। जमीयत उलेमा-ए-हिंद राजस्थान के प्रदेश उपाध्यक्ष हाफ़िज़ मंज़ूर अली ख़ान ने कहा कि मुसलमानों के इत्तेहाद (एकता) को कमज़ोर करने के लिए पूरी दुनिया की सांप्रदायिक ताक़तें एकजुट हो गई हैं।

उन्होंने कहा कि जब ईरान, अमेरिका और इज़रायल की आंख से आंख मिलाकर उनकी धमकियों का जवाब दे रहा है और विश्व के सुन्नी मुसलमान व कई मुस्लिम हुकूमतें उनका समर्थन कर रही हैं, तो अब ये सांप्रदायिक ताक़तें मुसलमानों की एकता को तोड़ने के लिए शिया-सुन्नी को आपस में लड़ाने की कोशिशें कर रही हैं।

पाकिस्तान धमाके का हवाला

हाफ़िज़ मंज़ूर ने पाकिस्तान की एक मस्जिद में जुमे की नमाज़ के दौरान हुए धमाके का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें तक़रीबन 30 शिया मुसलमानों को शहीद किया गया।

उन्होंने जोर देकर कहा, “मुसलमानों को यह समझना चाहिए कि ऐसी घटनाएं अब शिया-सुन्नी के आपसी इख़तिलाफ (मतभेद) की वजह से नहीं हो रही हैं, बल्कि यह अंतर्राष्ट्रीय साज़िशों का हिस्सा हैं जिन्हें सांप्रदायिक शक्तियों के एजेंट्स के ज़रिए अंजाम दिया जा रहा है।”

हमें मिलकर ऐसे हादसात की पुरज़ोर मज़म्मत (निंदा) करनी चाहिए और अपने इत्तेहाद को और ज़्यादा मज़बूत करना चाहिए ताकि इस्लाम के दुश्मनों के मंसूबों को नाकाम बनाया जा सके।

सभी देशों में अल्पसंख्यकों के लिए उठानी होगी आवाज़

हाफ़िज़ मंज़ूर ने निष्पक्षता की बात करते हुए कहा कि हमें विश्व के सभी देशों में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठानी चाहिए:

  • चाहे वो बांग्लादेश या पाकिस्तान में हिंदुओं के लिए हो।

  • चाहे वो भारत में मुस्लिम, ईसाई, सिख और पिछड़े समुदायों के लिए हो।

उपमहाद्वीप में बढ़ती असहिष्णुता

उन्होंने चिंता व्यक्त की कि इन दिनों भारतीय उपमहाद्वीप में सामाजिक असहिष्णुता बहुत तेज़ी से बढ़ रही है।

  • भारत के विभिन्न हिस्सों (विशेषकर असम व उत्तराखंड) में ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोग सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा देने में व्यस्त हैं।

  • पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी सांप्रदायिक घटनाएं सामने आ रही हैं।

इस प्रकार की घटनाएं मानवता को शर्मसार करने वाली हैं। हमें नफ़रत को ख़त्म करके भाईचारा बढ़ाने और समाज व देश की तरक़्क़ी के लिए मिलजुल कर प्रयास करने चाहिए।

मुस्लिम समाज से विशेष अपील

अंत में उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील करते हुए कहा, “इस्लाम का मतलब सलामती है। अतः जो समाज सलामती का अलमबरदार हो, उसको यह शोभा नहीं देता कि उसकी आंखों के सामने मानवता का ख़ून होता रहे और वह ख़ामोश तमाशाई बना रहे। मुस्लिम समाज की ज़िम्मेदारी है कि वह ज़ुल्म के ख़िलाफ़ उठ खड़ा हो और दुनिया में जहां कहीं भी ज़ुल्म हो रहा हो, उसके ख़ात्मे की कोशिश करे।”

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