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ईरान से डील को लेकर दुविधा में डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति की 2 घंटे चली सीक्रेट बैठक, फिर भी ईरान डील पर क्यों नहीं हुआ फैसला?

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वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित 60 दिन के युद्धविराम समझौते को लेकर नई जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान को लगभग 300 अरब डॉलर (करीब 25 लाख करोड़ रुपए) की आर्थिक सहायता और अमेरिकी कंपनियों के निवेश का प्रस्ताव दिया जा सकता है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक ईरानी अधिकारी ने इसे ‘पुनर्निर्माण कार्यक्रम’ (Reconstruction Program) बताया है। उनका कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं, तो ईरान को आर्थिक सहायता देने का वादा किया जाएगा। इस फंड का उपयोग देश के विकास और पुनर्निर्माण कार्यों में किया जा सकता है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते के काफी करीब पहुंच चुके हैं। ट्रम्प के अनुसार, इस समझौते में ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाने पर सहमत होगा और उसके समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम को नष्ट किया जाएगा।

ईरान ने ट्रंप के दावे को किया खारिज

हालांकि, ईरान ने ट्रम्प के इस दावे को खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि परमाणु मुद्दे पर फिलहाल कोई बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में सामने आ रही खबरें सही नहीं हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज एजेंसी (Fars News Agency) ने भी सूत्रों के हवाले से बताया है कि प्रस्तावित समझौते के मसौदे में एनरिच्ड यूरेनियम को नष्ट करने जैसी कोई शर्त शामिल नहीं है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर अभी भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

ट्रंप की शर्तें और परमाणु विवाद

इधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में करीब दो घंटे लंबी बैठक की। माना जा रहा था कि इस बैठक में ईरान को लेकर कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है, लेकिन बैठक खत्म होने के बाद भी किसी समझौते या सीजफायर पर अंतिम घोषणा नहीं हुई। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि ट्रंप वही समझौता करेंगे जो अमेरिका के हित में होगा और उनकी तय शर्तों को पूरा करेगा। अधिकारी ने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।

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ट्रंप ने सोशल मीडिया पर रखी अपनी बात

बैठक से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भी अपनी बात रखी। राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ पर लिखा- ईरान होर्मुज स्ट्रेट में बिछाई गई सी माइंस हटाएगा। इसके बाद अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करेगा और जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो जाएगी। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम को खोजकर नष्ट किया जाएगा। हालांकि ट्रंप ने साफ किया कि फिलहाल ईरान को कोई पैसा नहीं दिया जाएगा। यह बयान उन रिपोर्ट्स के बाद आया, जिनमें कहा गया था कि ईरान बातचीत के अगले चरण में जाने से पहले 12 अरब डॉलर की जब्त संपत्तियां जारी करने की मांग कर रहा है।

होर्मुज जलमार्ग का संकट

नए समझौते में होर्मुज जलमार्ग को खोलना सबसे बड़ी शर्त है। यह दुनिया का एक बहुत ही महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। ईरान को 30 दिनों के भीतर यहां से सभी समुद्री बारूदी सुरंगे हटानी होंगी। ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर कोई टैक्स नहीं लगा पाएगा। इसके बदले में अमेरिका ईरान के बंदरगाहों से नाकेबंदी हटाएगा। अमेरिका प्रतिबंधों में भी ढील देगा ताकि ईरान अपना तेल बेच सके।

अमेरिका-ईरान के बीच इन मुद्दों पर मतभेद?

दोनों देशों के बीच कई बड़े मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन बंद करे और अपने पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम किसी दूसरे देश को सौंप दे। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार ईरान के पास 60 फीसदी तक संवर्धित 440.9 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद है, जो हथियार-ग्रेड स्तर के काफी करीब माना जाता है। अमेरिका यह भी चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खोला जाए और वहां बिछाई गई माइंस 30 दिनों के भीतर हटाई जाएं। दूसरी तरफ ईरान अपनी विदेशों में फंसी करीब 24 अरब डॉलर की संपत्तियां वापस चाहता है। साथ ही वह यह गारंटी भी मांग रहा है कि अमेरिका भविष्य में किसी समझौते से पीछे नहीं हटेगा। ऐसे में बातचीत जारी है, लेकिन अभी अंतिम समझौते तक पहुंचना बाकी है।

अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर किया था हमला

इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर एक अचानक हमला किया था। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता और अन्य अधिकारी मारे गए थे। इसके बाद ईरान ने इस रास्ते को बंद कर दिया था। पहले यहां से रोज 100 से ज्यादा जहाज़ निकलते थे। अब सिर्फ दो दर्जन जहाज ही निकल पाते हैं। ईरान ने यहां टैक्स वसूलने के लिए एक नई एजेंसी बनाई है। इस वजह से अमेरिका ने इस हफ्ते ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। ट्रंप ने ओमान को भी इस मामले में दूर रहने की चेतावनी दी है।

दोनों पक्षों में अविश्वास

ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने अमेरिका पर भरोसा करने से इनकार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि हम बातचीत से नहीं बल्कि मिसाइलों से रियायतें हासिल करते हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि उनका ध्यान अभी सिर्फ युद्ध खत्म करने पर है। वे परमाणु योजना पर बात नहीं कर रहे हैं। ईरान चाहता है कि लेबनान में हिजबुल्ला और इस्राइल के बीच भी लड़ाई रुके। इसके साथ ही ईरान अपनी फ्रीज की गई अरबों डॉलर की रकम भी वापस चाहता है। ईरान की संसद के एक वरिष्ठ नेता इब्राहिम अजीजी ने साफ कहा कि हम कैश के बदले कैश की नीति पर ही काम करेंगे। फिलहाल दोनों देशों के बीच सात हफ्तों से युद्धविराम जारी है। दोनों तरफ से छोटे-मोटे हमले और आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। लेकिन फिर भी दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर बने हुए हैं।

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