मुंशी अब्दुल रज़्ज़ाक एडवोकेट की 63 वीं बरसी पर पेश की खिराजे अकीदत
बारां (रॉयल पत्रिका)। कोटा रियासत के मशहूर खिदमतगुजार हाजी मुल्ला मोहम्मद इस्माइल साहब जो की कौमी सामाजिक दीनी कामो का अपने दिल में बहुत जज़्बा रखते थे उनके घर में अब्दुल रजाक साहब की पैदाइश हुई। अब्दुल रजाक साहब ने अपनी आला तालीम कोटा में रह कर प्राप्त की और वकील बने आप भी अपने वालिद की तरह कौम की सेवा का बहुत जज़्बा रखते थे। आप ने कोटा रियासत के छोटे से कस्बे बारां में आ कर वकालत चालू की और समाज की सेवा में लग गए। आप जानते थे कि इल्म के बिना कोई समाज उन्नति नही कर सकता है। इसी को ध्यान में रख कर आप ने अपने साथियों के साथ मिलकर 1932 मे मदरसा अंजुमन इस्लामिया बारां की बुनियाद रखी व इसको अपने कब्जे में नही रखते हुए बारां के हर घर को जोड़ते हुए घर-घर एक-एक मुट्ठी आटा व जलसे में चंदा लेना चालू किया व सभी मुस्लिम पंचायत के मेम्बरो को जोड़ कर इसको लोकतांत्रिक तरीके से चलाया और इसकी आमदनी के लिए अपनी काफी जमीन अंजुमन में दी जिस कारण आज भी मदरसे में बच्चौ से नाम मात्र फीस ली जाती है। अंजुमन मैरीज हाल बन सका आज यह मदरसा मोहम्मद अशफाक भाईजान सीनियर सेकेंडरी स्कूल तक बढ़ चुका है। आपने मदरसा समाज के हवाले कर दिया केवल मदरसे की वक्त जरूरत इमदाद के लिए जलसे में झोली फैला कर चंदा लेने का काम अपने पास रखा व आप के बाद आपके बड़े बेटे मोहम्मद इस्हाक भाईजान एडवोकेट फिर छोटे बेटे मोहम्मद अशफाक भाईजान एडवोकेट फिर उनके बेटे एडवोकेट नवीद अशफाक रज़ा भाईजान ने झोली फैला कर चंदा लेने के काम को बखूबी निभाया, मोहम्मद इस्हाक भाईजान एडवोकेट के बेटे मोहम्मद आफाक भाईजान एडवोकेट ने अंजुमन सदर के तौर पर लंबे समय अपनी बेहतरीन खिदमत दी। आप ने कोटा पुराना मोटर स्टेण्ड चौराहा पर एक मस्जिद भी बनवाई जिसको 1990 के करीब आप के बेटे मोहम्मद अशफाक भाईजान ने किरायदारों से खाली करवा कर आबाद की व उसको भी समाज के हवाले कर दिया जिसमें आज लगातार जुमे व रमजान में तरावीह की नमाज़ भी होती है व यह सब की मदद से पहले से काफी बड़ी मस्जिद बन चुकी है। मुंशी अब्दुल रजाक एडवोकेट साहब व उनके परिवार ने जो समाज को दिया वह बेमिसाल है उनकी कोई होड़ नही कर सकता है। मौत एक सच्चाई है एक दिन सभी को जाना होगा 7 अक्टूबर 1962 को मुंशी अब्दुल रजाक एडवोकेट साहब दुनिया छोड़ कर चले गए लेकिन उनके काम आज भी जिंदा है समाज उनका एहसास कभी नही चुका सकता, हम उनके बताये रास्ते पर चले मदरसे को सीनियर सेकेंडरी तक तो ले गए लेकिन वह काफी नही है वहां सीनियर सेकेंडरी के अन्य विषय भी चालू हो व स्कूल से कालेज तक बन जाए जिससे हमारे बच्चों को बहुत नाम मात्र फीस में उच्च शिक्षा मिल सके वह उच्च शिक्षा प्राप्त कर बड़े पदो पर काम कर समाज का घर परिवार का नाम रोशन कर सके यह मुंशी अब्दुल रजाक एडवोकेट साहब को सही तौर पर श्रद्धांजलि होगी। खिराजे अकीदत के दौरान ये रहे मौजूद:- मरहूम मुंशी अब्दुल रजाक साहब की 63 वीं बरसी के मौके पर मदरसा अंजुमन इस्लामियां कमेटी के पदाधिकारी ओर स्टॉफ के लोगों ने कब्रिस्तान क्लाडिया में पहुंच कर दुआएं मगफिरत की। इस दौरान नायब सदर जाकिर मंसूरी, सेकेट्री मोहम्मद आसिफ भाईजान, प्रोग्राम कन्वीनर इकबाल नेता, सदस्य शाहिद कुंडी, मोहतमिम अब्दुल कय्यूम, नासिर खान बंटी, वाईस प्रिंसिपल मोहम्मद आबिद देशवाली, जाहिद खान सहित बड़ी संख्या में स्टॉफ मौजूद रहा।
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