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नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघिन रानी ने दिया पांच शावकों को जन्म

Jaipur

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  • बायोलॉजिकल पार्क में वन्यजीवों के लिए गर्मी से राहत के खास इंतजाम

जयपुर। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से एक बार फिर खुशखबरी आई है। यहां बाघिन रानी ने पांच शावकों को जन्म दिया है, जिनमें एक सफेद और चार गोल्डन रंग के शावक शामिल हैं। शावकों के जन्म के बाद वन विभाग ने बाघिन और उसके बच्चों की निगरानी बढ़ा दी है। पार्क में सीसीटीवी कैमरों के जरिए भी सतत निगरानी रखी जा रही है। शावकों के जन्म की खबर फैलते ही वन विभाग के अधिकारियों और वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।बाघिन रानी का बाघ शिवाजी के साथ जोड़ा बनाया गया था। बाघिन रानी ने दूसरी बार शावकों को जन्म दिया है। पहले 10 मई 2024 को रानी ने तीन शावकों को जन्म दिया था।एसीएफ प्राची चौधरी के मुताबिक बाघिन रानी को मार्च 2021 में ओडिशा के नंदनकानन से जयपुर नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क लाया गया था। बाघ शिवाजी को जुलाई 2022 में ग्वालियर के गांधी जूलॉजिकल पार्क से लाया गया था। बाघिन रानी ने 5 शावकों को जन्म दिया है। इनमें एक का रंग सफेद और 4 गोल्डन कलर के हैं।वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से बाघिन और शावकों की मॉनिटरिंग की जा रही है। सीसीटीवी कैमरे से भी निगरानी रखी जा रही है। बाघिन के शावक होने से वन विभाग के अधिकारियों- कर्मचारियों और वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर है। आने वाले दिनों में बाघिन के नए शावक पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेंगे।

10 मई 2024 को बाघिन रानी ने तीन शावकों को जन्म दिया था। एक सफेद और तीन गोल्डन शावक हुए थे। कुछ दिन बाद ही एक शावक की मौत हो गई थी। दोनों शावक हष्ट पुष्ट और स्वस्थ थे, जिनके नाम भीम और स्कंधी रखे गए थे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नाहरगढ़ टाइगर सफारी के लोकार्पण कार्यक्रम में दोनों शावकों का नामकरण किया था। स्कंधमाता के नाम से मादा शावक का नाम स्कंधी रखा गया था। नर शावक काफी हष्ट पुष्ट होने की वजह से उसका नाम भीम रखा गया था।इससे पहले 2019 में बाघिन रंभा ने दो शावकों को जन्म दिया था, लेकिन दोनों शावकों की बीमारी की वजह से मौत हो गई थी। वन्यजीवों की सफल ब्रीडिंग के मामले में नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क का नाम उभरता जा रहा है। वुल्फ के सफल प्रजनन के मामले में भी नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क सबसे ऊपर है। पिछले दिनों भालू ने भी बच्चों को जन्म दिया था। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में भीषण गर्मी से वन्यजीवों को राहत देने के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। वन्यजीवों की डाइट और दिनचर्या में बदलाव करते हुए उन्हें गर्मी से बचाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। पार्क में एंक्लोजरों के भीतर डक्टिंग सिस्टम, कूलर और फव्वारे लगाए गए हैं, ताकि तापमान को कम किया जा सके और जानवरों को ठंडा वातावरण मिल सके। ओपन एरिया में बने शेल्टरों पर भी डक्टिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे लगातार पानी टपकता रहेगा और मिट्टी में नमी बनी रहेगी। इससे जानवरों को गर्मी में भी ठंडक का अहसास होगा। साथ ही, पेड़-पौधों की नमी और ग्रोथ बनाए रखने के लिए भी फव्वारों का उपयोग किया जा रहा है।

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