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बारहठ परिवार जैसे बलिदान का विश्व इतिहास में नहीं दूसरा उदाहरण- ओंकारसिंह लखावत

Jaipur

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शब्बीर हुसैन 

कोटा, (रॉयल पत्रिका)। स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहूति देने वाले क्रांतिकारी केसरीसिंह बारहठ के पुत्र अमर शहीद कुंवर प्रतापसिंह बारहठ का जयंती समारोह शनिवार को यहां कोटा विकास प्राधिकरण ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान धरोहर विकास प्राधिकरण अध्यक्ष ओंकारसिंह लखावत थे। समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान धरोहर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने बारहठ परिवार के पीढियों से राष्ट्ररक्षा के लिये दिये जा रहे बलिदानों को याद किया और कहा कि विश्व इतिहास में ऐसा दूसरा उदाहरण नहीं हैं, जब स्वयं केसरी सिंह बारहठ, उनके भाई जोरावर सिंह बारहठ और पुत्र प्रताप सिंह बारहठ के अलावा उनके जामाता ईश्वरदान आशिया समेत पूरे परिवार ने आजादी के आंदोलन में अपना सर्वस्व त्याग किया हो। लखावत ने शाहपुरा, भीलवाड़ा में 4 करोड़ की लागत से बारहठ परिवार का पैनोरमा निर्माण का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि कोटा के क्रांतिकारियों के क्रांतिकर्म की याद को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये यहां भी 1 करोड़ की लागत से स्मारक बनायेंगे। उन्होंने कहा कि क्रांतिकारी केसरी सिंह बारहठ के गांव देवजी का खेड़ा को धरोहर गांव के रुप में विकसित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रुप में कोचिंग गुरु और मोटिवेशनल स्पीकर राजवीर सिंह चलकोई ने प्रतापसिंह बारहठ के क्रांति कर्म पर प्रकाश डालते हुए रासबिहारी बोस और सचीन्द्र सान्याल के साथ वीर प्रताप की क्रांतिकारी गतिविधियां और चांदनी चौक में लॉर्ड हॉर्डिग्ज पर बम फेंकने से लेकर बरेली जेल में यातनाएं सहते हुये दम तोड़ने तक प्रताप के पूरे जीवन संघर्ष को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा, संभागीय आयुक्त राजेन्द्र सिंह शेखावत, भाजपा शहर अध्यक्ष राकेश जैन, पूर्व महापौर महेश विजय, कोटा डेयरी अध्यक्ष चैन सिंह राठौड़, पूर्व कुलपति प्रो. हाकम दान और और खादी बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष पंकज मेहता भी उपस्थित थे। समारोह के दौरान 3 श्रेणियों में वीर माता माणिक कंवर नारीशक्ति वन्दन सम्मान उमा रत्नू को, प्रताप सिंह बारहठ स्वाभिमान सम्मान सतना, मध्यप्रदेश के शहीद कर्णवीर सिंह को, जोरावर सिंह बारहठ पराक्रम सम्मान ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए शहीद सुरेन्द्रसिंह मोगा को प्रदान किया गया।

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