भारत की मुस्लिम देशों को लेकर पॉलिसी में बदलाव आ रहा है
लेकिन देश के अंदर मुसलमानों के साथ सख्ती जारी है
एम खान
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। अमेरिका, इजरायल की दोस्ती एवं हिंदूत्व की नीति पर चलने के कारण भाजपा की मोदी सरकार की विदेश नीति कुछ अलग ही नजर आ रही थी। भारत ने इजरायल से इतनी गहरी दोस्ती कर ली थी कि करीब 60 मुस्लिम देश भी पीछे छूट गए। भारत विश्व का पहला ऐसा देश है जिसने इजरायल-हमास युद्ध के दौरान करीब 25000 मजदूर इजरायल भेजें। मोदी सरकार का यह बड़ा फैसला था। मोदी सरकार ने मुस्लिम देशों से संबंधों की कोई चिंता नहीं की थी। देश की पूर्ववर्ती सरकारों ने हमेशा स्वतंत्र फिलीस्तीन देश की पैरवी की थी और इजरायल के पक्ष में कभी नहीं दिखाई दिए। लेकिन अमेरिका की सत्ता में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद और भारत-पाकिस्तान के बीच तीन दिवसीय युद्ध के बाद देश की विदेश नीति बदलती दिखाई दे रही है। भारत का दोस्त माना जाने वाला अमेरिका भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा देता है और भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता है। जबकि जवाब में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कोई जवाब नहीं देते हैं और पुरानी दोस्ती का पूरा सम्मान करते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश हित में अमेरिका और इजरायल से दूरी बनाना शुरू कर दिया और चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान से नजदीकी बढ़ाना शुरू कर दिया। मोदी ने चीन की यात्रा करके चीन से दोस्ती बढ़ाने की कोशिश की है और पाकिस्तान से क्रिकेट मैच खेल कर पुरानी दुश्मनी भूलने का संकेत दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया के मुस्लिम देशों के साथ भी अच्छे संबंध बनाने के प्रयास कर रहे हैं जिससे देश का व्यापार बढ़ सके और अमेरिकी टैरिफ से होने वाले घाटे की भरपाई हो सके। भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ में इसी कारण से स्वतंत्र फिलीस्तीन देश बनाने के पक्ष में मतदान किया है।
मुस्लिम के साथ घरेलू मोर्चे पर व्यवहार-
विदेश में मोदी सरकार मुस्लिम देशों के साथ अच्छे संबंध बना रही है और यहां तक की कट्टर दुश्मन देश पाकिस्तान के साथ भी 14 सितंबर को दुबई में क्रिकेट मैच खेल लिया। इस क्रिकेट मैच का भारत की जनता ने पुरजोर विरोध किया। लेकिन मोदी सरकार ने देश की जनता की भावनाओं को समझने की कोशिश नहीं की। दूसरी तरफ देश में भाजपा शासित राज्यों में मुसलमानो के साथ सख्ती जारी है। उत्तर प्रदेश, असम, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और महाराष्ट्र आदि प्रदेशों में कभी मुसलमानो के घरों पर, दरगाहों पर, मस्जिदों पर, तो कभी मदरसों पर कोई ना कोई सरकारी कागजात की कमी बताकर प्रशासन बुलडोजर चला देता है। भाजपा शासित प्रदेशों में प्रशासन का अल्पसंख्यकों के साथ पक्षपात साफ झलकता है। जबकि मुसलमान भी भारत के सर्वमान्य नागरिक हैं और उनके पुरखों ने देश की आजादी में कुर्बानी और आजादी के बाद विकास में योगदान दिया है। वर्तमान में मुस्लिम समुदाय देश के विकास में उतना ही योगदान देता है जितने दूसरे समुदाय। फिर मुसलमानो के साथ कभी वक्फ संशोधन बिल तो कभी धार्मिक बिल लाकर परेशान करने की कोशिश की जाती है। जबकि सभी जानते हैं कि देश की आर्थिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास के लिए देश में आपसी भाईचारा, सौहार्द एवं शांति जरूरी है। किसी भी पार्टी के लिए देश और उसका विकास जरूरी होना चाहिए।
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