हाड़ौती में वैश्य समाज के नेताओं की राजनीति खतरे में दिखाई दे रही है !
अंता विधानसभा उपचुनाव वैश्य समाज के नेताओं के लिए निर्णायक दिखाई दे रहा है
एम खान
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र में वैश्य समाज की राजनीति काफी होशियारी भरी दिखाई देती रही है। कोटा, बारां और झालावाड़ की राजनीति में वैश्य समाज के नेताओं का वर्चस्व दिखाई देता रहा है।
संख्या के आधार पर देखें तो इन तीनों जिलों में वैश्य समाज की जनसंख्या 2-3 प्रतिशत से ज्यादा नहीं है। लेकिन समाज के विधायक और सांसद आसानी से जीत कर आते हैं। भाजपा का वोट बैंक समझा जाने वाला वैश्य समाज के नेता हाड़ौती क्षेत्र (कोटा, बारां, झालावाड़) जिले में दोनों बड़ी पार्टी भाजपा और कांग्रेस में मजबूत पकड़ रखते हैं।
हाड़ौती में वैश्य नेताओं का दबदबा: कुछ उदाहरण
- शांति धारीवाल करीब चार बार विधायक का चुनाव जीत चुके हैं, जबकि उनकी विधानसभा सीट पर वैश्य वर्ग के 20 हजार वोट भी नहीं है।
- इसी तरह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कोटा संसदीय क्षेत्र से लगातार दूसरी बार चुनाव जीते हैं।
- बारां जिले में प्रमोद जैन भाया अब तक तीन बार चुनाव जीत चुके हैं और चौथी बार अंता विधानसभा उपचुनाव में मैदान में है।
- इसी तरह प्रताप सिंह सिंघवी भी दो बार विधायक बन चुके हैं।
दोनों पार्टियों में से किसी भी पार्टी की सरकार बने लेकिन हाड़ौती के वैश्य नेताओं को सरकार में शक्तिशाली पद और पोर्टफोलियो मिलते रहे हैं। हाड़ौती में वैश्य समाज का वर्चस्व कब तक कायम रहेगा, हाड़ौती के दूसरे समुदायों और जाति वर्गों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
वर्चस्व का कारण
वैसे वैश्य जाति के नेताओं का अच्छा पढ़ा लिखा होना, आर्थिक मजबूत स्थिति और राजनीतिक सूझबूझ उनकी सफलता का कारण है। वैश्य समाज के नेता अपनी पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व से घनिष्ठता भी रखते हैं।
क्या वर्चस्व बना रहेगा?
हाड़ौती क्षेत्र में ओबीसी, दलित, आदिवासी एवं अल्पसंख्यक समाज के लोगों की बड़ी जनसंख्या है। ओबीसी और आदिवासी समाज में शिक्षा एवं आर्थिक संपन्नता आने के कारण इन समाजों में राजनीति के नेतृत्व भी तेजी से उभर रहा है। वैश्य समाज के ओबीसी और आदिवासी समाज के लोग भी अपने नेताओं के पीछे लामबंद होने लगे हैं।
बढ़ती चुनौती के संकेत
- लोकसभा में प्रहलाद गुंजल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को कड़ी टक्कर दी थी।
- अंता में कंवर लाल मीणा (भाजपा) ने 2013 विधानसभा चुनाव में प्रमोद जैन भाया (कांग्रेस) को हराया था।
- इसी तरह अंता के विधानसभा चुनाव (11 नवंबर 2025) में नरेश मीणा, प्रमोद जैन भाया को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
- शांति धारीवाल कोटा में मुस्लिम बाहुल्य सीट से जीतते हैं। अब उनका भी विरोध होने लगा है।
जैसे-जैसे समाज में शिक्षा और राजनीतिक जागरूकता बढ़ रही है, राजनीति के मापदंड भी बदल रहे हैं। जनता अब किसी एक के पीछे बंधी नहीं रहती है। इसलिए भविष्य में हाड़ौती क्षेत्र में वैश्य नेताओं का वर्चस्व ज्यादा दिनों तक कायम रह सकता है, निश्चित नहीं है।
Disclaimer
Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.
Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।

अंता विधानसभा उपचुनाव वैश्य समाज के नेताओं के लिए निर्णायक दिखाई दे रहा है