हिंदुस्तान को मंगोलो के प्रकोप से बचाने वाला बादशाह
अलाउद्दीन खिलजी का नाम तो सबने सुना ही होगा। दिल्ली सल्तनत का वह बादशाह जिसे इतिहास में सिर्फ एक निर्दयी और बबेर बादशाह के रूप में याद किया जाता है। लेकिन अलाउद्दीन वही बादशाह है जिसने हिंदुस्तान को खतरनाक और क्रूर मंगोलों से एक नहीं, बल्कि कई बार बचाया। अगर खिलजी उस समय हिंदुस्तान को मंगोलो से न बचाता तो आज हिंदुस्तान का नक्शा कुछ और होता।
चलिए हम आपको बताते हैं अलाउद्दीन खिलजी और मंगोलों का रोचक इतिहास………
मंगोलों को दुनिया के सबसे खतरनाक लड़ाकों में शुमार किया जाता था। उस समय माना जाता था कि मंगोलों को हराया नहीं सकता और कहा जाता था कि यह भगवान की तरफ से भेजा गया प्रकोप (Scovrge of god) है।
मंगोल कितने खतरनाक थे इनका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह जिंदा इंसान को पल भर में खा जाते थे। प्यास लगने पर घोड़े की नस काटकर खून पी लेते थे। उनकी गंध इतनी तेज थी कि 2 मील पहले लोग पहचान लेते थे कि मंगोलों का हमला होने वाला है। मंगोल जहां भी हमला करते उस जगह को पूरी तरह बर्बाद कर दिया करते थे।

मंगोलों ने भारत पर 1297 से 1306 ई. तक लगातार कई बार भयानक हमले किए।
उस समय हिंदुस्तान में दिल्ली की गद्दी पर अलाउद्दीन खिलजी बैठा था। खिलजी की वजह से ही कई कोशिशों के बाद भी मंगोल भारत पर कब्जा करने में नाकाम रहे। ये अलाउद्दीन खिलजी ही था जिसकी वजह से मंगोलों को एक या दो बार नहीं बल्कि 6 बार अपने कदम वापस खीचने पड़े। मंगोलों के अटैक से खिलजी बहुत क्रोधित हुआ और युद्ध के बाद उसने हजारों मंगोलों को बंदी बना लिया। इसके बाद उसने करीब 8000 मंगोलों का सिर दिल्ली में बन रहे ‘सिरी फोर्ट’ में चुनवा दिया था। इसलिए इस शहर का नाम ‘सर’ के नाम ‘सिरी’ रखा गया।

ऐतिहासिक अभिलेखों से यह भी पता चलता है कि इसके बाद अलाउद्दीन ने मंगोलों पर कई क्रूर हमले किए, जिसके बाद कई वर्षों तक मंगोलों ने भारत पर आक्रमण करने की हिम्मत नहीं की।
Disclaimer
Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.
Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।
