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रसायन शास्त्र के सबसे पहले जनक थे जाबिर बिन हयान:

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आधुनिक केमिस्ट्री के पितामह की गौरवगाथा

परिचय (सन् 721 ईस्वी – सन् 815 ईस्वी)

अबू मूसा जाबिर बिन हयान, जिन्हें दुनिया “रसायन शास्त्र (Chemistry) का पिता” कहती है, का जन्म ईरान के तूस शहर में हुआ था। पश्चिमी देशों में इन्हें ‘गेबर’ (Geber) के नाम से जाना जाता है। उनके पिता अहमद हयान एक औषधि विक्रेता (Druggist) थे।

प्रारंभिक जीवन और संघर्ष

जाबिर के जन्म के कुछ समय बाद ही उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद उन्हें अपनी माँ के साथ यमन जाना पड़ा। यमन में उन्होंने महान शिक्षक हरबी अल-हिमयरी से कुरान और गणित की शिक्षा ली। बाद में वे कूफा लौटे और इमाम जाफर सादिक र. अ. जैसे महान गुरु के शिष्य बने, जहाँ से उनके वैज्ञानिक बनने का सफर शुरू हुआ।

  • प्रयोगशाला की स्थापना: जाबिर ने कूफा में अपनी प्रयोगशाला बनाई।

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  • पदार्थों का वर्गीकरण: वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने पदार्थों को तीन श्रेणियों—वनस्पति, पशु और खनिज में विभाजित किया।

तेजाब (Acids) की क्रांतिकारी खोज

जाबिर बिन हयान ने ही दुनिया को पहली बार एसिड से परिचित कराया। उन्होंने ऐसे शक्तिशाली अम्ल तैयार किए जो सोने को भी पिघला सकते थे।

  1. नमक का तेजाब (Hydrochloric Acid)

  2. गंधक का तेजाब (Sulfuric Acid)

  3. एक्वा रेजिया (Aqua Regia): वह मिश्रण जो सोने को पिघला देता है।

[यहाँ जाबिर बिन हयान की प्रयोगशाला का एक काल्पनिक चित्र लगाया जा सकता है]

महत्वपूर्ण आविष्कार और वैज्ञानिक कार्य

भले ही जाबिर सोना बनाने के अपने लक्ष्य में सफल नहीं हुए, लेकिन उनकी खोजों ने आधुनिक रसायन विज्ञान की नींव रखी। वे खलीफा हारून अल-रशीद के दरबार में शाही रसायन शास्त्री (Alchemist) भी रहे।

  1. आसवन (Distillation): उन्होंने ‘कुरअ अल-अंबीक’ नामक यंत्र बनाया, जो आज के ‘रिटॉर्ट’ जैसा था। यह तकनीक आज पेट्रोल और इत्र बनाने में अनिवार्य है।

  2. सटीक तराजू: उन्होंने एक ऐसा तराजू बनाया जो 1 किलो के 6000वें हिस्से से भी कम वजन को माप सकता था।

  3. औद्योगिक तकनीकें: लोहे को जंग से बचाना, कपड़ों को वाटरप्रूफ बनाना और चमड़े को रंगने के केमिकल फॉर्मूले उन्होंने ही तैयार किए।

वैज्ञानिक दर्शन: “प्रयोग ही ज्ञान की नींव है”

जाबिर बिन हयान का मानना था कि किताबी ज्ञान से बड़ा ‘अनुभव’ है। उनका प्रसिद्ध कथन था:

“हम वही लिखते हैं जो हमने देखा और आजमाया है।”

जाबिर बिन हयान की प्रमुख पुस्तकें

जाबिर ने लगभग 3,000 से अधिक किताबें लिखीं, जिन्हें ‘जाबेरियन कॉर्पस’ कहा जाता है। उनकी रचनाओं ने यूरोप में विज्ञान की क्रांति ला दी।

  • किताब अल-कीमिया (Kitab al-Kimya): इस ग्रंथ का लैटिन अनुवाद यूरोप में रसायन विज्ञान का आधार बना।

  • किताब अल-सबाइन (Kitab al-Sab’een): इसमें धातुओं के शोधन और दवाओं के निर्माण की 70 विधियाँ दी गई हैं।

  • किताब अल-रहमा (Kitab al-Rahma): यह पदार्थों के रूपांतरण के सिद्धांतों पर आधारित एक प्रसिद्ध रचना है।

  • किताब अल-तज्मिया: इसमें प्रयोगशाला में कृत्रिम जीवन की संभावनाओं और तत्वों के संतुलन (मिज़ान) पर चर्चा की गई है।

सम्मान और वैश्विक विरासत

जाबिर बिन हयान केवल रसायन शास्त्री ही नहीं, बल्कि तर्कशास्त्र, खगोल शास्त्र और दर्शन शास्त्र के भी प्रकांड विद्वान थे। उनके वैज्ञानिक योगदान को सम्मान देने के लिए चंद्रमा के एक क्रेटर (Crater) का नाम ‘गेबर’ रखा गया है।

निष्कर्ष

आज के दौर में जब हम आधुनिक प्रयोगशालाओं का उपयोग करते हैं, तो हमें जाबिर बिन हयान की उस मेहनत को नहीं भूलना चाहिए जिन्होंने संसाधनों की कमी के बावजूद विज्ञान को ‘अनुभव’ और ‘प्रयोग’ की नई दिशा दी।

लेखक: फ़ज़लुर्रहमान

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