लिव इन में रहने वालों के लिए कोर्ट की कानून बनाने की मंशा, ताकि समाज से नुकसान ना हो
जयपुर। लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों के लिए हाईकोर्ट ने कानून बनाए जाने की मंशा जताई है। वहीं इस संबंध में केन्द्र व राज्य सरकार को भी आगामी कार्रवाई के लिए कहा है, ताकि ऐसे रिश्ते में रहने वाले जोड़ों को अपने परिवार, रिश्तेदारों और समाज के सदस्यों के हाथों कोई खतरा न हो।इसके अलावा इनके रजिस्ट्रेशन के लिए कानून नहीं बनाए जाने तक हर जिले में इनके रजिस्ट्रेशन के लिए भी सक्षम प्राधिकरण बनाए जाने की बात कही। अदालत ने कहा कि यह प्राधिकरण ऐसे जोड़ों से जुड़ी समस्याओं का निस्तारण भी करें। इन रिश्तों से पैदा होने वाले मुद्दों के समाधान के लिए भी अदालत ने एक वेबसाइट शुरू करने के लिए भी कहा है। इसके अलावा अदालत ने यह मुद्दा वृहद पीठ के पास तय करने के लिए भेजा है कि क्या एक विवाहित व्यक्ति बिना विवाह विच्छेद के अविवाहित व्यक्ति के साथ रह रहा है या/और क्या दो अलग-अलग विवाह वाले दो विवाहित व्यक्ति बिना विवाह विच्छेद के लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रहे हैं। क्या विवाह विच्छेद के मामले में न्यायालय से संरक्षण आदेश प्राप्त करने के हकदार हैं। जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने यह आदेश लिव इन में रहने वाले जोड़ों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हमारे देश में लिव इन को सामाजिक मान्यता नहीं है। लेकिन कानून की नजर में यह अवैध भी नहीं है। देश में लिव इन पर कानून नहीं होने से कोर्ट के अलग-अलग फैसलों के चलते बहुत से लोग भ्रमित हो जाते हैं।
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