देश की राजनीति सिर्फ मुस्लिम मुद्दों से चल रही है!
- संसद में मुस्लिम आरक्षण और वक्फ संशोधन बिल चर्चा में
जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। देश की राजनीति में युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, आसमान छूती महंगाई, देश के कोने-कोने में फैला भ्रष्टाचार, सभी को अनिवार्य शिक्षा, देश पर बढ़ता कर्ज, कमजोर विदेश नीति, जातिवाद एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोल डीजल के भाव कम होने के बावजूद देश में उच्च स्तर पर भाव और डॉलर के मुकाबले गिरती रुपए की कीमत जैसे मुद्दों को नेता और जनता गंभीर नहीं मान रही है। देश में महंगाई, भ्रष्टाचार एवं बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर आंदोलन होना बंद से हो गए हैं। देश की संसद और विधानसभाओं में विकास के मुद्दों पर बहस होना कमजोर होता जा रहा है। देश की राजनीति एवं देश में चुनाव सिर्फ कुछ ही विशेष मुद्दों तक सिमट कर रह गए हैं। इन्ही मुद्दों को लेकर संसद और विधानसभाएं चर्चा में रहती है। सोमवार को भाजपा नेताओं ने कर्नाटक में सरकारी ठेकों में अल्पसंख्यकों के चार प्रतिशत आरक्षण को लेकर हंगामा किया और संविधान विरोधी बताया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर बाबा साहब के संविधान को बदलने का आरोप लगाया। देश में मुस्लिम आरक्षण, राजनीति के लिए अब बड़ा मुद्दा बन सकता है। इससे पहले मंदिर-मस्जिद, लव जिहाद, मॉब लिंचिंग , मस्जिदों में मंदिरों की खोज, बाबर-औरंगजेब, बांग्लादेशी, रोहिंग्या और देश के गद्दार जैसे शब्दों पर राजनीति चल रही थी। वर्तमान में विश्व के देश चंद्रमा और मंगल पर बस्तियां बसाने की योजना पर काम कर रहे हैं लेकिन हमारे देश में शिक्षा विभाग सूर्य नमस्कार का विश्व रिकार्ड बनाने की योजना पर काम कर रहा है।
- मुस्लिम आरक्षण को मुद्दा बनाया जा रहा है
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने अल्पसंख्यकों को 4 प्रतिशत आरक्षण सरकारी ठेकों में देने का प्रावधान किया है। यह कांग्रेस शासित प्रदेश में किया गया है। कांग्रेस पार्टी ने देश में करीब 50 से 60 वर्ष तक शासन किया है, केंद्र की सत्ता में रहते कांग्रेस ने कभी भी मुस्लिमों की शिक्षा, रोजगार एवं आर्थिक स्थिति पर ध्यान नहीं दिया। यही कारण है कि देश का मुस्लिम दलितों से ज्यादा पिछड़ गया। अब जबकि सरकारी ठेकों में चार प्रतिशत सभी अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों को आरक्षण देने से मुसलमानों को कोई बड़ा फायदा होने वाला नहीं है। क्योंकि ठेकेदारी करने वाले पूरे कर्नाटक में 50 से 100 लोगों से ज्यादा नहीं होंगे। लेकिन मुस्लिम आरक्षण देने के नाम पर कांग्रेस पूरे देश में राजनीति करती फिरेगी। भाजपा वैसे भी ऐसे मुद्दों की तलाश में रहती है, जो उसे आसानी से मिल गया है। विपक्षी नेताओं को मुस्लिम मुसलमानों की भावनाओं से खेलना अच्छा लगता है। दूसरी तरफ मुस्लिम के मुख्य मुद्दों पर सभी दल चाहे पक्ष हो और विपक्ष सभी चुप हैं। देश के आगामी चुनाव मुस्लिम आरक्षण और वक्फ संशोधित बिल पर फोकस रह सकते हैं। क्यूंकि देश की जनता भावनाओ में जी रही है। जनता की भावनाओं से खेलकर सत्ता की कुर्सी नेताओ को मिल रही है।
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