परकोटे में ई-रिक्शा प्रतिबंध से सैकड़ों परिवारों में रोज़ी-रोटी की चिंता बढ़ी
ई-रिक्शा चालकों का दर्द — काम बंद तो घर कैसे चले?
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। आमेर और परकोटे में ई-रिक्शा के संचालन पर रोक (बैन) के फैसले के खिलाफ ई-रिक्शा चालकों का गुस्सा फूट पड़ा। 10 जनवरी तक लगाए गए इस प्रतिबंध से नाराज सैकड़ों चालक आमेर रोड पर उतर आए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
“पेट की आग” और परिवार का संकट
चालकों का कहना है कि प्रशासन के इस फैसले से उनकी रोजी-रोटी पर गहरा संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने प्रशासन से तीखा सवाल उठाया कि अगर काम बंद रहा तो वे अपने परिवार का गुजारा कैसे करेंगे? “पेट की आग” और परिवार की चिंता को लेकर चालकों ने अपनी व्यथा सुनाई।
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मुख्य चिंता: चालकों के पास आय का कोई दूसरा साधन नहीं है।
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बैन की अवधि: यह प्रतिबंध 10 जनवरी तक प्रभावी रहेगा।
पुलिस की समझाइश से टला टकराव
विरोध प्रदर्शन के दौरान मौके पर तनाव की स्थिति बन गई थी, लेकिन पुलिस की सूझबूझ से मामला बिगड़ते-बिगड़ते बच गया।
एसीपी ने संभाला मोर्चा
एसीपी (ACP) सुरेंद्र सिंह राणावत ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। उन्होंने आक्रोशित प्रदर्शनकारी चालकों से बातचीत की और समझाइश कर मामला शांत कराया, जिससे बड़ा टकराव टल गया। फिलहाल पुलिस ने चालकों को समझाकर रास्ता खुलवा दिया है, लेकिन चालकों के मन में रोजगार छिनने का डर अभी भी बना हुआ है।
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