नौतपा की भीषण गर्मी में रखें सेहत का ख्याल
आमतौर पर मई का मतलब होता है भीषण गर्मी और लू। हालांकि, इस बार हालात कुछ सामान्य हैं, क्योंकि चक्रवात के कारण देश के कई हिस्सों में बारिश से तापमान सामान्य से कम है। इन सबसे बीच लोगों को अभी नौतपा का डर सता रहा है। नौतपा यानी वे नौ दिन जब सूर्य से धरती पर आग बरसेगी और भीषण गर्मी पड़ेगी। इसे नवताप भी कहा जाता है। इस बार नौतपा 25 मई से शुरू हो रहा है, जो कि 2 जून, 2025 तक चलेगा। ये 9 दिन साल के सबसे गर्म दिन होते हैं। शास्त्रों के मुताबिक, नौतपा तब लगता है, जब ज्येष्ठ महीने में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है। इस दौरान दिन के समय में घर से बाहर निकलना किसी खतरे से कम नहीं होता है। वहीं कुछ खास हेल्थ कंडीशन से जूझ रहे लोगों को नौतपा में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है क्योंकि उनका शरीर ज्यादा गर्मी झेलने के लिए सक्षम नहीं होता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 2024 में भारत में हीट स्ट्रोक से 360 लोगों की मौत हुई थी। वहीं ‘हीट वॉच’ नामक संस्था की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि असल में यह आंकड़ा सरकारी आंकड़ों से दोगुना यानी 733 है। हालांकि कुछ सुरक्षा उपायों से नौतपा की तेज गर्मी से बचा जा सकता है। नौतपा आमतौर पर मई के आखिरी और जून के पहले हफ्ते में होता है। इस समय हवाएं गर्म और शुष्क होती हैं, जो तापमान को और बढ़ा देती हैं। इस दौरान सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी कम हो जाती है। इससे सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं और भीषण गर्मी महसूस होती है। नौतपा के दौरान जब तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है तो शरीर पर इसका सीधा असर पड़ता है। तेज गर्मी और लगातार पसीना आने की वजह से शरीर में नमक-पानी की कमी हो जाती है। इससे व्यक्ति को कमजोरी महसूस होने लगती है, चक्कर आ सकते हैं और थकावट बनी रहती है। अगर शरीर का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाए तो बुखार, सिरदर्द, उल्टी और कभी-कभी बेहोशी भी हो सकती है। तेज गर्मी के कारण स्किन रैशेज और घमौरियां हो सकती हैं। इसके अलावा गर्मी में पाचन तंत्र भी प्रभावित होता है। खाना जल्दी पचता नहीं है, जिससे दस्त या उल्टी की समस्या हो सकती है।
- नौतपा में किन लोगों को ज्यादा रिस्क होता है?
वैसे तो नौतपा हर किसी के लिए खतरनाक है। लेकिन कुछ लोगों को इसका रिस्क अधिक रहता है। जैसेकिजो लोग धूप में ज्यादा समय बिताते हैं। जो लोग किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। इसके अलावा छोटे बच्चों, बुजुर्गों और प्रेग्नेंट वुमन को भी इसका रिस्क ज्यादा होता है। शरीर का तापमान बढ़ने पर हार्ट, लंग्स, लिवर और ब्रेन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे में जो लोग पहले से इससे जुड़ी बीमारियों से पीड़ित हैं, उनके लिए ज्यादा गर्मी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है।
क्या हो सकती है परेशानी ?
दिल
गर्मी में जब शरीर का तापमान बढ़ता है तो उसे कंट्रोल करने के लिए ब्लड सर्कुलेशन तेज हो जाता है। इससे हार्ट को खून पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
सांस संबंधी समस्याएं
तेज, गर्म और शुष्क हवा अस्थमा या अन्य सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल बना सकती है। इस मौसम में स्मोकिंग करने वालों को सांस संबंधी समस्या और इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा होता है।
किडनी
तेज गर्मी किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है। जब शरीर डिहाइड्रेट होता है तो किडनी पर ज्यादा दबाव पड़ता है और वे शरीर से टॉक्सिन्स को ठीक से फिल्टर नहीं कर पातीं। इससे किडनी फेल्योर या सीवियर इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
शुगर
तेज तापमान का असर ब्लड शुगर लेवल पर भी पड़ता है। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ा सकता है, जिससे शरीर शुगर को ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाता। ऐसे में डायबिटिक लोगों के लिए शुगर लेवल कंट्रोल में रखना मुश्किल हो सकता है और उनकी स्थिति बिगड़ सकती है।
दिमागी हेल्थ कंडीशन
तापमान बढ़ने के साथ ही स्ट्रेस, एंग्जाइटी, डिप्रेशन और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) जैसी मेंटल कंडीशन के ट्रिगर होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
मोटापा
अधिक वजन वाले लोगों के शरीर में फैट की परत गर्मी को बाहर निकलने से रोकती है। इससे शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में उन्हें डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है।
हाइपरटेंशन
तेज गर्मी हाइपरटेंशन से पीड़ित लोगों में ब्लड प्रेशर को अस्थिर कर सकती है और हार्ट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
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