Loading...

भारतीय राष्ट्रवाद के प्रतीक:- अल्लाह बख़्श सूमरो

Jaipur

Follow us

Share

आजादी का भूला बिसरा हीरो अल्लाह बख्श सूमरो जिसने धर्म के नाम देश के बंटवारे के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की तथा कई हज़ारों लोगों का जनसमर्थन हासिल किया। देश के इस महान शहीद का जन्म सन 1900 में शिकारपुर में एक सिंधी परिवार में हुआ। वे ब्रिटिश कालीन भारत के जमीदार,सरकारी ठेकेदार,स्वतंत्रता सेनानी व राजनेता थे। वह सिंध के सबसे श्रेष्ठ राजप्रमुखों में गिने जाते है। वह सिंध प्रान्त के दो बार मुख्यमंत्री रहे थे। अल्लाह बख्स सूमरो ने इस्लामिक संघठनो ओर राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करने के लिए अखिल भारतीय आज़ाद मुस्लिम सम्मेलन की स्थापना की, जिन्होंने एकजुट हिंदुस्तान का समर्थन किया ओर भारत के विभाजन का विरोध किया। 27 से 30 अप्रैल 1940 के बीच अल्लाह बख़्श सूमरो ने दिल्ली में देशभक्त मुसलमानों का एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया, जिसमे पूरे देश से लगभग 75000 लोग हिस्सा लेने पहुंचे थे। अंग्रेज सूमरो के आंदोलन से काफी नाराज थे, ओर इसी वजह से उन्हें दी गई ‘खान बहादुर’ की उपाधि वापस ले ली तथा उन्हें सिंध के मुख्यमंत्री पद से भी हटा दिया। धार्मिक आधार पर बंटवारे का विरोध करने वाले सूमरो से मुस्लिम लीग व जिन्ना नफ़रत करते थे। उनका मानना था कि भारत एक देश बने जिसे संयुक्त राज्य भारत कहा जाए, जहां हिन्दू ओर मुस्लिम मिलकर रहे। साम्प्रदायिकता के सख्त विरोधी रहे सूमरो की लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगता है कि खान अब्दुल गफ्फार खान और मोलाना आज़ाद भी उनके तर्क के समर्थक थे। 14 मई 1943 को अल्लाह बख़्श सूमरो की हत्या कर दी गई जब वे अपने गृहनगर शिकारपुर में तांगे से यात्रा कर रहे थे। अफवाह थी कि मुस्लिम लीग ने उनकी प्रसिद्धि से घबराकर उनकी हत्या करवाई थी। राजनीतिक विश्लेषकों ने उनके लिए यहां तक कहा था सिंध विधानसभा पाकिस्तान के प्रस्ताव का समर्थन नही करती अगर उस समय अल्लाह बक्श सूमरो जीवित होते।

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।