बरेली में बुलडोजर ऐक्शन पर सुप्रीम कोर्ट का ब्रेक:
याचिकाकर्ता को राहत, अब HC करेगा सुनवाई
7 दिन की मिली अंतरिम राहत — बीडीए की टीम लौटी बैरंग
बरेली (रॉयल पत्रिका)। यूपी के बरेली के सूफी टोला में ‘गुड मैरिज हॉल’ और ‘एवान-ए-फरहत’ बरातघरों पर पिछले दो दिन से चल रहा बीडीए (बरेली विकास प्राधिकरण) का बुलडोजर ऐक्शन फिलहाल रुक गया है। गुरुवार को लगातार तीसरे दिन बीडीए की टीम ध्वस्तीकरण के लिए पहुंची थी, लेकिन याचिकाकर्ताओं की ओर से जैसे ही वकील ने अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश दिखाए, बुलडोजर सहित टीम वापस लौट गई।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: पहले हाई कोर्ट जाएं
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को हाई कोर्ट में याचिका दायर करने को कहा है। इसके साथ ही उन्हें सात दिन की अंतरिम राहत भी दी है।
बरातघर के संचालकों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। गुरुवार को फरहत जहां की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की।
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कोर्ट का रुख: कोर्ट ने कहा कि हम याचिका पर सीधे सुनवाई नहीं करना चाहते, लेकिन आर्टिकल 226 के तहत याचिकाकर्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र हैं।
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विशेष निर्देश: कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता हाई कोर्ट की सम्बन्धित बेंच में त्वरित सुनवाई की अपील दायर करते समय इस बात का उल्लेख कर सकते हैं कि ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पहले ही प्रारंभ की जा चुकी है।
आदेश देखते ही रुका काम
याचिका में जानकारी दी गई थी कि निर्माण का कुछ हिस्सा ध्वस्त भी कर दिया गया है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सात दिन की अंतरिम सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक फिलहाल बीडीए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं कर पाएगा।
बरेली बवाल के बाद हुआ है ऐक्शन
बरेली में पिछले 26 सितंबर को हुए बवाल के आरोपियों पर पुलिस की कार्रवाई के साथ ही अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर ऐक्शन भी चला है।
बीडीए ने बुधवार को मौलाना तौकीर रजा के करीबी सूफी टोला निवासी सपा नेता सरफराज वली खां और राशिद खान के बारातघरों पर दूसरे दिन भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की थी। ‘गुड मैरिज हॉल’ और ‘एवान-ए-फरहत’ पर यह कार्रवाई की गई। इससे पहले एक शादी हॉल की छत पर लगे मोबाइल टॉवर को भी हटाने की कार्रवाई की गई।
बीडीए का पक्ष
बुधवार शाम तक कथित अवैध निर्माण के काफी हिस्से को जमींदोज कर दिया गया था। वहीं, बीडीए उपाध्यक्ष डॉ. ए. मनिकंडन ने कहा था कि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी, हालांकि अभी कोर्ट के आदेश का पालन किया जा रहा है।
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