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सुपर-अलनीनो ने बढ़ाई चिंता, पूरी दुनिया में मचेगा हाहाकार! भीषण गर्मी, सूखा तो कहीं होंगे बाढ़ के हालात

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नई दिल्ली। आने वाले दिन भारत और पूरी दुनिया के लिए बेहद चिंता बढ़ाने वाले है। कहीं रिकॉर्ड गर्मी तो कहीं कमजोर मानसून, कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिल सकती हैं। अमेरिकी मौसम एजेंसी ‘नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ (NOAA) के अनुसार इस साल सुपर अल नीनो का आना लगभग तय हो गया है। नोआ ने आगामी मौसम को लेकर पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें उसने अक्टूबर 2026 से फरवरी 2027 तक ‘सुपर’ अलनीनो की सबसे अधिक संभावना जताई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पहले ही अलनीनो से मानसूनी बारिश कम होने की चिंता जता चुका है।

मौसम विभाग के मुताबिक, भारत में सामान्य रूप से मानसून की एंट्री 1 जून को केरलम से होती है। भारत में इस बार मानसून तय समय से 4 दिन पहले 26 मई को केरलम पहुंच सकता है। वहीं इस बार मानसून अन्य प्रदेशों में भी जल्द पहुंचेगा। राजस्थान में इसके 20 जून, मध्य प्रदेश में 12 जून, उत्तर प्रदेश में 18 जून और बिहार में 8-10 जून के बीच पहुंचने की संभावना है।

आखिर क्या है अल नीनो

अल नीनो एक जलवायु घटना है, जो प्रशांत महासागर में पानी गर्म होने पर होती है। इससे मानसूनी हवाएं दिशा बदल देती हैं। इसके असर से भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में बारिश कम होगी और भीषण गर्मी पड़ेगी। यदि सुपर अलनीनो आता है, तो यह अब तक के सबसे शक्तिशाली अलनीनो के बराबर हो सकता है। 1877 का वह विनाशकारी अलनीनो जिसने 1876 से 1878 तक वैश्विक अकाल को जन्म दिया था। इस अकाल में 5 करोड़ से अधिक लोग मारे गए थे, जो उस समय विश्व की जनसंख्या का 3% था।

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अलनीनो के नए पूर्वानुमान ने डराया

14 मई को प्रकाशित एक नए ENSO पूर्वानुमान में, नोआ का अनुमान है कि आगामी अलनीनो के अक्टूबर से शुरू होने पर मजबूत या बहुत मजबूत श्रेणी में आने की 65% संभावना है, जो इसे रिकॉर्ड किए गए इतिहास में सबसे मजबूत अलनीनो में से एक बना सकता है। अक्टूबर से फरवरी की अवधि के लिए अत्यंत शक्तिशाली अलनीनो यानी समुद्र की सतह के तापमान में 3.6 डिग्री फारेनहाइट (2 डिग्री सेल्सियस) की बढ़ोतरी, जिसे अनौपचारिक रूप से सुपर अलनीनो कहा जाता है। कुछ एक्सपर्ट तो इसे राक्षस तक कहते हैं।

अपना ही रिकॉर्ड तोड़ सकता है अलनीनो

अगर ऐसा हुआ तो आने वाला अलनीनो खुद ही रिकॉर्ड तोड़ सकता है। अल्बानी विश्वविद्यालय में वायुमंडलीय और पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर पॉल राउंडी ने 5 मई को X पर लिखा-1870 के दशक के बाद से सबसे बड़े अल नीनो की संभावना को लेकर विश्वास स्पष्ट रूप से बढ़ रहा है।

दुनियाभर में तबाही मचाएगा सुपर अलनीनो

अलनीनो की घटनाएं हर दो से सात वर्षों में होती हैं। जब उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में हवा और समुद्री धाराओं के पैटर्न में बदलाव के कारण समुद्र की सतह का तापमान ऐतिहासिक औसत से 0.9 फ़ारेनहाइट (0.5 डिग्री सेल्सियस) अधिक हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक जलवायु पर गहरा प्रभाव पड़ता है। दुनिया तेजी से तटस्थ अवस्था से बाहर निकल रही है।

2023-24 को अलनीनो ने बनाया सबसे गर्म साल

दुनिया का सबसे हालिया अलनीनो मई 2023 से मार्च 2024 तक चला और 2024 को अब तक का सबसे गर्म वर्ष बनाने के लिए आंशिक रूप से जिम्मेदार था। क्लाइमेट ब्रीफ के 21 अप्रैल को प्रकाशित जलवायु आकलन के अनुसार, यदि आगामी अलनीनो शक्तिशाली या अत्यंत शक्तिशाली होता है, तो 2027 पिछले रिकॉर्ड को पार कर सकता है।

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