अजमेर दरगाह में मोहर्रम के चलते 13 दिन थमेगी सूफियाना कव्वाली
गम-ए-हुसैन और जिक्र-ए-कर्बला होगा
अजमेर, (रॉयल पत्रिका)। इंसानी दिल को सुकून और रूह को सुकून देने वाली सूफियाना कव्वाली का सिलसिला अजमेर शरीफ दरगाह में सदियों से जारी है। ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में आने वाले जायरीन सूफी कव्वालियों के जरिए रूहानी सकून पाते हैं, लेकिन मोहर्रम का चांद दिखाई देने के साथ ही दरगाह में कव्वालियों का सिलसिला 13 दिनों के लिए रुक गया है। इस्लामिक नए साल की शुरुआत मोहर्रम से होती है और इस महीने में मुसलमान गम-ए-हुसैन मनाते हैं। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद ﷺ के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने करबला के मैदान में शहादत दी थी, जिसे याद करते हुए मोहर्रम के दिनों में सूफी दरगाहों में कव्वालियां बंद कर दी जाती हैं।
दरगाह में जियारत का सिलसिला जारी, नहीं बजेगी कव्वाली
विश्व प्रसिद्ध अजमेर दरगाह में देश-विदेश से हजारों जायरीन रोजाना हाजिरी देने और मन्नतें मांगने आ रहे हैं। इस दौरान जायरीन दरगाह में जियारत और फातिहा तो कर सकेंगे, लेकिन उन्हें सूफियाना कव्वालियां सुनने को नहीं मिलेंगी। दरगाह में अब इन 13 दिनों में गम-ए-हुसैन और जिक्र-ए-कर्बला किया जाएगा।
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