राज्य सरकार जनजातीय विकास के लिए संकल्पित – भजनलाल शर्मा
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जनजाति समुदाय ने सदियों से प्रकृति, संस्कृति, साहस और सत्य के मार्ग को जीवंत रखा है। राजस्थान के हृदय में सबसे जीवंत और प्रखर धारा के रूप में हमारे आदिवासी भाई-बहन हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासियों का इतिहास संघर्ष से भरा है, लेकिन उससे भी अधिक गौरवपूर्ण है। इन्होंने जल, जंगल और जमीन के साथ संतुलन बनाकर विश्व को जीना सिखाया है। त्योहारों, गीतों और परम्पराओं से राजस्थान की पहचान को समृद्ध बनाया है।
उन्होंने कहा कि जनजातियों के नृत्य में ताल ही नहीं, बल्कि पीढ़ियों की कहानियां समाहित हैं। इसी प्रकार, त्योहारों में रंग ही नहीं, आदिवासी गौरव की चमक भी बसती है। राज्य सरकार इन परम्पराओं को संजोने के साथ ही दुनिया के सामने गर्व से पेश करेगी। राज्य सरकार जनजाति कल्याण के लिए कृत-संकल्पित है।
शर्मा शनिवार को डूंगरपुर के श्री भोगीलाल राजकीय महाविद्यालय में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित राज्य स्तरीय जनजातीय गौरव दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब हम भगवान बिरसा मुंडा को याद करते हैं, तब हमें प्रदेश के उन अमर जननायकों का भी स्मरण करना चाहिए, जिन्होंने इस धरती को वीरता और बलिदान से पवित्र किया। गोविंद गुरु ने मानगढ़ की पहाड़ियों पर भील समाज को संगठित कर भगत आंदोलन का नेतृत्व किया। इसी प्रकार, वीर बालिका कालीबाई ने महज 12 वर्ष की आयु में अपने गुरु की रक्षा के लिए बलिदान दिया। ये सभी केवल नाम नहीं हैं बल्कि हमारी धरोहर और पहचान हैं।
प्रधानमंत्री विकास को बना रहे सर्वांगीण, सर्वव्यापी और सर्वसमावेशी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘विकास को सर्वांगीण, सर्वव्यापी और सर्वसमावेशी बनाने के लिए निरन्तर कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में जनजातीय समाज के उत्थान के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए गए हैं, जो नए भारत की आधारशिला बन रहे हैं। देश भगवान बिरसा मुंडा के निःस्वार्थ त्याग और राष्ट्रसेवा के लिए सदा ऋणी रहेगा, प्रधानमंत्री का यह वाक्य केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकल्प है कि हम धरती आबा के आदर्शों के मार्ग पर निरंतर चलते रहेंगे।
जनजातीय बालिकाओं ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किया देश का प्रतिनिधित्व
शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज के विकास के लिए दृढ़ संकल्पित है। प्रमुख घोषणाएं और कार्य:
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छात्रावासों में मैस भत्ता: ₹2,500 से बढ़ाकर ₹3,250 प्रतिमाह।
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खेल अकादमियों में मैस भत्ता: ₹2,600 से बढ़ाकर ₹4,000 प्रति माह।
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मा-बाड़ी केंद्र: 232 नए केंद्रों की स्थापना और स्टाफ के मानदेय में दो वर्षों में लगातार 10-10 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि।
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कृषक लाभ: 8 लाख 39 हजार जनजाति किसानों को मुफ्त संकर मक्का बीज वितरण किया गया, साथ ही 2 लाख 36 हजार मिनिकिट वितरित किए गए।
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वन धन विकास केंद्र: प्रदेश के 9 जिलों में 530 केंद्रों का गठन कर डेढ़ लाख से अधिक महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है।
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कौशल विकास: लगभग 5 हजार जनजातीय युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है।
उन्होंने कहा कि तृतीय राष्ट्रीय लेक्रोस चैंपियनशिप में राज्य के जनजातीय प्रतिभा के 55 खिलाड़ियों ने 6 वर्गों में 5 स्वर्ण और 1 कांस्य पदक जीता है। लेक्रोस खेल में जनजातीय बालिकाओं ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एशियन चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व कर रजत पदक जीता है।
प्रधानमंत्री की पहल से जनजातीय समुदायों का हो रहा सामाजिक-आर्थिक विकास
शर्मा ने कहा कि आजादी के बाद दशकों तक जनजाति समाज के योगदान को वह सम्मान नहीं मिला, जिसका वह हकदार है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2021 से हर वर्ष 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की। उनकी यह पहल इन समुदायों के महान योगदान, बलिदान और गौरवशाली विरासत को सच्चा सम्मान है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने “सबका साथ-सबका विकास” के मूलमंत्र के साथ जनजातीय समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
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धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान: गत वर्ष 2 अक्टूबर को शुरू हुआ। इसका उद्देश्य बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका जैसी कमियों को दूर कर जनजातीय समुदायों का समग्र और सतत विकास सुनिश्चित करना है।
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पीएम-जनमन (PM JanMan): यह अभियान कमजोर जनजातीय समूहों का सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित कर रहा है।
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