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सोशल मीडिया: दिमाग़ पर छाई दुनिया, बच्चों पर बढ़ता असर

Jaipur

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आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया केवल एक संचार का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह लोगों के दिमाग़ पर हावी हो चुका है। ख़ासकर, युवा और बच्चे इसका सबसे अधिक शिकार बन रहे हैं। माता-पिता खुद अपने बच्चों को मोबाइल और इंटरनेट तक पहुँच देते हैं, लेकिन क्या उन्होंने कभी सोचा कि यह उनके लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है?

आजकल माँ-बाप अपने बच्चों की हर गतिविधि सोशल मीडिया पर डालने लगे हैं। उनकी तस्वीरें, वीडियो, स्कूल की उपलब्धियाँ, यहाँ तक कि उनकी मासूमियत भी सोशल मीडिया के लाइक्स और शेयर के खेल में फँस गई है। जब बच्चे देखते हैं कि उनके माता-पिता सोशल मीडिया पर हर चीज़ साझा कर रहे हैं, तो वे भी उसी दिशा में बढ़ने लगते हैं। छोटे-छोटे बच्चे भी अब अपने फॉलोअर्स और लाइक्स की गिनती करने लगे हैं। वे रील्स बनाने और वायरल होने की चाहत में समय बर्बाद कर रहे हैं। इससे न केवल उनकी पढ़ाई पर असर पड़ रहा है, बल्कि मानसिक तनाव और सामाजिक अलगाव भी बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को सोशल मीडिया की लत से बचाने के लिए स्क्रीन टाइम सीमित करें और उन्हें असली दुनिया से जोड़ें। यदि अभी ध्यान नहीं दिया गया, तो यह समस्या आने वाले समय में और गंभीर हो सकती है।

डॉ. मोहम्मद शोएब

(प्रदेश सचिव, प्रदेश कांग्रेस कमेटी राजस्थान)

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