इज्ज़त भी गई, पैसा भी खर्च हुआ और मनमानी भी नही हो पाई अमेरिका की !
अमेरिका की जो इज्जत इजराईल-ईरान युद्ध से पहले हुआ करती थी अब वैसी नही रही। करीब 80 वर्षों में अमेरिका ने विश्व में जो मनमानी का राज कायम किया था, वह अब खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है। इजराईल अमेरिका का एक प्रॉक्सी संगठन (देश) है जिसके जरिये मध्य पूर्व के मुस्लिम देशों को दवाब में रखता था। कई मुस्लिम देशों में अमेरिका की कठपुतली शासक सत्ता संभाल रहे हैं। यह शासक बिना अमेरिका की मर्जी से एक कदम भी नहीं बढ़ा सकते हैं। एक देश जिसकी स्थापना फिलिस्तीन की जमीन पर हुई थी। उसी फिलिस्तीन देश को इजराईल ने बर्बाद कर दिया। फिलिस्तीनी अपनी आज़ादी के लिए संघर्ष करते रहे और इजराईल की सेना उन पर अत्याचार करती रही। आज़ादी की लड़ाई में इजराईल ने करीब लाखों फिलिस्तीनी बच्चों, महिलाओं और मर्दों की हत्या करदी। लेकिन अमेरिका का संरक्षण मिलने के कारण इजराईल का कोई भी देश और अंतर्राष्ट्रीय एंजेसिया कुछ नहीं बिगाड़ पायी। यूरोपीय और अन्य देश फिलिस्तीनियों की हत्याओं को इजराईल का अपनी सुरक्षा के लिए उठाए कदम बताते रहें। इजराईल ने अमेरिका के आदेश पर दर्जनों मुस्लिम देशों में पिछले 50 वर्षों में लड़ाकू विमानों, मिसाईलो एवं ड्रोन से हमले किए। किसी भी मुस्लिम देश में इजराईल के हमलों का पलटवार करने की हिम्मत नही थी और न ही शक्ति थी। जब भी कुछ मुस्लिम देशों ने पलटवार कर इजराईल को जबाव देने की कोशिश की तुरंत अमेरिका ने उस देश को धमका दिया। यही कारण है कि कई मुस्लिम देश गुपचुप तरीके से इजराईल और अमेरिका का मुकाबला करने के लिए अन्दरखाने तैयारी करते रहे। इनमें ईरान और तुर्किए प्रमुख देश हैं। ईरान और तुर्किए ने केवल अपने-अपने देशों में ही तैयारी नहीं की बल्कि दूसरे देशों एवं संगठनों को भी सैन्य तकनीक उपलब्ध करवायी। ईरान ने फिलिस्तीनी संगठन हमास, लेबलान के हिजबुल्ला और यमन के हूती एवं कुछ इराकी संगठनो को सैन्यरूप से मजबूत किया। इसी तरह तुर्की ने पाकिस्तान, सीरिया, अजरबेजान, बांग्लादेश, मालदीव, इंडोनीशिया, मलेशिया आदि देशों को सैन्य मजबूती दी। वर्तमान में तुर्किए को ईरान से भी ज्यादा ताकतवर माना जा रहा है। क्योंकि तुर्किए का विश्व के 60 प्रतिशत ड्रोन मार्केट पर कब्जा है। तुर्किए ने 5वीं पीढ़ी का फाईटर विमान कान का निर्माण कर लिया है जो विश्व के कुछ ही देश बना पाए हैं। ईरान की सैन्य तैयारियों का अंदाजा इजराईल और अमेरिका नही लगा पाए। ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता विश्व में सबसे ज्यादा ताकतवर निकलकर सामने आयी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा भी कि यदि में युद्ध विराम नही करवाता तो इजराईल पूरी तरह बर्बाद हो जाता। ईरान विश्व में एक मात्र ऐसा देश उभरकर सामने आया है जो अमेरिका की मनमानी नहीं चलने देता है। ईरान ही एक मात्र देश है जिसने अमेरिका के हमलों के जवाब में पलटवार किया और कतर, बहरीन और ईराक में अमेरिका के सैन्य अड्डों को मिसाइलों से उड़ा दिया। अमेरिका ईरान की मिसाइलों से डर गया। ईरानी मिसाइलों को रोकने के लिए और इजराईल की सुरक्षा के लिए अमेरिका ने अपनी इंटरसेप्टर मिसाइलों पर करीब 70 हजार करोड़ रुपए खर्च किये। माना यह भी जा रहा है कि यदि युद्ध 10 दिन और चलता तो इजराईल पूरी तरह बर्बाद हो चुका होता और अमेरिका कंगाल हो जाता।
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