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मौत को कसरत से याद करो

Jaipur

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वाक़िआ ये है कि इस दुनिया में ज़रा सा कोई मामूल के ख़िलाफ़ सफ़र दरपेश आ जाए तो उसकी पहले से तैयारियां हैं, उसके तज़किरे हैं, उसके लिए पहले से क्या कुछ मंसूबे बनाए जाते हैं, लेकिन जब आख़िरत का सफ़र पेश आता है और वो सफ़र भी ऐसा है बैठे बैठे पेश आ जाता है। पहले मालूम होता है कि साहब मेरे बग़ैर इस दुनिया की गाड़ी नहीं चल सकती। मैं नहीं हूंगा तो बच्चों का क्या होगा? बीवी का क्या होगा? और कारोबार का क्या होगा? वो वक़्त आ रहा है लेकिन हम और आप इसके बारे में सोचने के लिए तैयार नहीं। अपने हाथों से जनाज़ों को कंधे देते हैं, अपने हाथों से अपने प्यारों को क़ब्र में उतारते हैं, अपने हाथों से उनको मिट्टी दे कर आते हैं। लेकिन ये समझ कर बैठ जाते हैं कि उनके साथ हो गया ये वाक़िआ। हमारा इसके साथ क्या ताल्लुक़?

सरकार-ए-दो आलम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फ़रमाते हैं: “लज़्ज़तों को ख़त्म करने वाली चीज़ यानी मौत को कसरत से याद किया करो।”

ज़रा हम अपना जायज़ा लें कि चौबीस घंटों में से कितना वक़्त हम इस मौत को याद करने में सर्फ़ करते हैं? बहर हाल, इस हदीस के ज़रिए हुज़ूर-ए-अक़दस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बतला दिया कि तुम्हारी बुनियादी बीमारी ये है कि तुम आख़िरत से ग़ाफ़िल हो। आख़िरत अगर तुम्हारे पेश-ए-नज़र हो जाए, आख़िरत तुम्हारी आंखों के सामने आ जाए और उसकी फ़िक्र तुम्हारे दिल व दिमाग़ पर सवार हो जाए, तुम्हारी सारी ज़िंदगी की मुश्किलात ख़त्म हो जाएं। सारे जराइम, सारी बद-आमाली, सारी बद-उनवानी इस बुनियाद पर हैं कि इसी दुनिया के गिर्द हमारा दिमाग़ चक्कर लगा रहा है, आख़िरत की तरफ़ नहीं देखता, आख़िरत को नहीं सोचता। इसका माल हड़प कर लूं, इसका हक़ ज़ाए कर दूं, इसका ख़ून पी जाऊं। ये सब इसलिए करता है ताकि मेरी दुनिया दुरुस्त हो जाए। मरने के बाद क्या होगा, इसकी कुछ फ़िक्र नहीं।

और ये फ़िक्र सरवर-ए-कौनैन हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पैदा की, और ये जो कुछ आप सीरत के अंदर अमन व अमान के, सुकून और इत्मीनान के वाक़िआत पढ़ते हैं, वो दर-हक़ीक़त इस फ़िक्र-ए-आख़िरत का नमूना हैं, कि दिल व दिमाग़ पर हर वक़्त जन्नत का ख़्याल छाया हुआ है कि अल्लाह के सामने पेश होना है, वो जन्नत नज़र आ रही है और उस जन्नत के ख़्याल में, अल्लाह तबारक व तआला के सामने पेश होने के ख़्याल में इंसान जो काम करता है वो अल्लाह तआला को राज़ी करने वाला करता है।

 

 

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