देश के विकास के लिए धार्मिक सौहार्द जरूरी है
विश्व में बदलाव का दौर जारी है। रूस- यूक्रेन और इजराईल हमास युद्ध के कारण दुनिया दो भागों में बटती नजर आ रही है। यह युद्ध तीसरे विश्व युद्ध का कारण भी बन सकता है। विश्व में अमेरिका की दादागिरी संकट में दिखाई दे रही है। चीन, रूस और ईरान की ओर से अमेरिका और यूरोपीय देशों को बड़ी चुनौती मिल रही है। विश्व के दर्जनों देश तकनीकी और आर्थिक रूप से तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारत के पड़ोसी देश चीन ने छठवी पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाकर उड़ा लिया और अमेरिका, रूस, फ्रांस से आगे निकल गया। हमारा देश भारत चौथी पीढ़ी का विमान भी दूसरे देशों से खरीद रहा है। ईरान और तुर्कीए विश्व में ड्रोन पावर बन गए। दोनों देश हाई तकनीकी युक्त ड्रोन दूसरे देशों को बड़े पैमाने पर बेच रहे हैं एवं पैसा कमा रहे हैं। पाकिस्तान जो हमेशा से भारत से दुश्मनी रखता है, चीन के साथ पांचवी पीढ़ी का J-20 लड़ाकू विमान बनाकर दूसरे देशों को बेच रहा है। दूसरे देशों के वैज्ञानिक एवं नागरिक नई-नई खोज करके अपने-अपने देशो को शक्तिशाली बनाने में योगदान दे रहे हैं। जबकि भारत में पढ़े-लिखे, बड़े-बड़े अधिकारी एवं विषेशज्ञ मस्जिदों के नीचे, दरगाहों और खानकाहों के बीच शिवलिंग एवं मंदिरो की खोज पर पूरे जोर लगाए हुए हैं। इस कारण देश में हिंदू -मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव फैल रहा है। उत्तर प्रदेश का संभल इसका ताजा उदाहरण कहा जा सकता है। जहां पांच लोग पुलिस के गोली से मारे गए। कुछ लोग अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती र. अ. की दरगाह के नीचे शिव मंदिर तलाश रहें हैं। भारत की करीब 140 करोड़ जनसंख्या है। जिसमें करीब 25 -30 करोड़ की मुस्लिम आबादी है । हिंदू मुस्लिम मिलकर देश को दुनिया की आर्थिक शक्ति बना सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैसे भी भारत को विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की बात करते हैं। लेकिन मोदी के 10 वर्ष के कार्यकाल में देश की विकास दर बढ़ नहीं रही है। युवाओं में बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है। धार्मिक- तनाव और नफरत के चलते समाजे और जातियों के लोग एक दूसरे से सामान खरीदने बेचने (आर्थिक प्रतिबंधों) की बाते करने लगे हैं और अज्ञान लोग ऐसा कर भी रहे हैं। भारत को विश्व की चौथी आर्थिक शक्ति बनाने के लिए देशा मैं धार्मिक सौहार्द की जरूरत है। देश में अशांति एवं नफरत के माहौल में मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा किया जाने वाला निवेश कम हो जाता है या बंद हो ताजा हैं। नये कारखाने और विकास प्रोजेक्ट शुरु नही होने के कारण युवाओं, मजदूरों को रोजगार मिलना बंद हो जाता है। देश की आर्थिक सीमाएं सिकुड़ना शुरू कर देती है। इसलिए देश को आर्थिक पॉवर बनाने के लिए देश में धार्मिक सौहार्द के साथ-साथ कानून का शासन जरूरी है। नफरत के माहौल में कोई देश तरक्की नहीं कर सकता है। इजराइल का उदाहरण लिया जा सकता है। इजराईल के यहूदी मुसलमानों से नफरत करते हैं। पड़ोसी मुस्लिम देशों को समूल नष्ट करने के लिए मिसाइल, लड़ाकू विमान, गोला बारूद और टैंको को बड़े पैमाने पर भंडार किया। फिर भी एक वर्ष की जंग में किसी मुस्लिम देश को मिटा नहीं पाया और युद्ध के कारण स्वयं पंचास वर्ष पीछे चला गया। इजराईल की मुस्लिम से नफरत के कारण उसके स्वयं के मिटाने तक युद्ध जारी रहने वाला है। ऐसी स्थिति में जो इजराईल एवं पावरफुल देश हुआ करता था, वह आज बर्बादी के कगार पर है। नफरत के व्यवहार से कोई भी देश, समाज और व्यक्ति विकास नहीं कर सकता है आखिरकार उसे बर्बाद होना होता है।
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