आगरा में करणी सेना और दलितों में टकराव होने से बचा, राहत मिली
- आगरा दलितों का गढ़ माना जाता है और उनकी आर्थिक, सामाजिक एवं संघर्ष करने की स्थिति काफी मजबूत मानी जाती है। दूसरी तरफ करणी सेना में राजपूत समाज के लोगों की बहुसंख्या है, जिसको ऐतिहासिक लड़ाकू माना जाता है।
जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। उत्तर प्रदेश की ताज नगरी आगरा में करणी सेना का समाजवादी पार्टी सांसद रामजीलाल सुमन के खिलाफ प्रदर्शन ने देश को गंभीरता से सोचने पर मजबूर कर दिया। खबरों के अनुसार करीब एक लाख राजपूतों ने करणी सेना के नेतृत्व में हाथों में डंडे, तलवार एवं अन्य हथियार लेकर आगरा स्थित सांसद रामजीलाल सुमन के मकान की ओर जाने की कोशिश की। एक बार तो करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन को एकत्रित तैनात पुलिस बल को भी घेरने की कोशिश की। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार के पुलिस अधिकारियों की सूझबूझ एवं कड़े सुरक्षा इंतजाम के चलते खतरा टल गया और करणी सेना को सांसद रामजीलाल सुमन के मकान एवं कार्यकर्ताओं को नुकसान नहीं पंहुचाने दिया। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं और जाति से राजपूत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की करणी सेना और राजपूत राजा राणा सांगा के प्रति सहानुभूति है इसलिए करणी सेना को कानून का खुला उल्लंघन करने पर भी कोई बड़ी परेशानी नहीं हो पाई।
- आगरा में दलित मजबूत स्थिति में
उत्तर प्रदेश के आगरा में दलित समुदाय काफी मजबूत स्थिति में है। आर्थिक और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से भी अच्छी और जागरूक स्थित है। आगरा के दलितों का जाति संघर्ष का एक बड़ा इतिहास है। आगरा के दलित लड़ाई झगड़े एवं संघर्ष के लिए पूरे भारत में पहिचाने जाते हैं। आगरा में दलितों का मुसलमानों एवं जाटों, ब्राह्मणो, वैश्यों से कई बार संघर्ष हुआ है और आगरा शहर में कर्फ्यू जैसी स्थिति पैदा हुई है। आगरा के दलित उस क्षेत्र के दलितों के प्रेरणादायक हैं उनको कोई भी वर्ग आसानी से दबा और झुका नहीं सकता है। इसलिए सांसद रामजीलाल सुमन और समाजवादी पार्टी के कई कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर कहते पाए गए कि करणी सेना और दलित और पिछड़ों के बीच से पुलिस हटा ली जाए, हम अपनी सुरक्षा खुद कर लेंगे।
- दलित और करणी सेना का टकराव रुकना देशहित में है
देश में 17% दलित हैं और किसी भी राजनीतिक पार्टी को सत्ता में लाने और बाहर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दलितों में शिक्षा, जागरूकता एवं सामाजिक परिवर्तन तेजी से आया है और आ रहा है। दलित अब सरकार में उच्च पदों तक सीमित है। ऐसी स्थिति में दलितों को कमजोर समझना भारी भूल होगी। करणी सेना का विरोध देश के दलितों को एक मंच पर ला सकता है और पिछड़ों का भी उनको साथ मिल सकता है। जैसे समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि हमारी पार्टी के किसी भी सांसद कार्यकर्ता का असम्मान सहन नहीं किया जाएगा। वैसे भी दलितों के वोट 2014 के बाद भाजपा को बड़ी तादाद में मिल रहे हैं। दलितों के साथ कोई भी बड़ी हरकत भाजपा के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
- रामजीलाल सुमन की टिप्पणी पर न्यायालय की शरण लेनी चाहिए करणी सेना को
संसद में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन ने राजपूत राजा राणा सांगा पर टिप्पणी की, जिस पर देशभर के राजपूत एवं भाजपा के लोग नाराज हैं और सांसद से माफी मांगने एवं सांसद पद से बर्खास्त करने की मांग कर रहे हैं। करणी सेना के बैनर तले लाखों लोगों का आगरा में विरोध प्रदर्शन करना देश की बड़ी घटना है। यह घटना देश में वर्ग संघर्ष को बढ़ावा दे सकती है। किसी भी देश के लिए वर्ग संघर्ष हमेशा ही नुकसानदायक होता है। देश आर्थिक रूप से पिछड़ जाता है। देश में पहले से ही थोड़ा बहुत सांप्रदायिक तनाव बना हुआ है। अब वर्ग संघर्ष और जातिवाद देश के लिए हानिकारक ही रहेगा। वैसे ही दुनिया में बड़ी उथल-पुथल चल रही है। छोटे-छोटे देश ड्रोन, मिसाइल, जहाज बेचकर पैसा कमा रहे हैं, लेकिन भारत में जाति वर्ग और धार्मिक उन्माद बढ़ रहा है जो देश के विकास में रुकावट है।
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