राजस्थान यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग के बुरे हाल , सालों तक नहीं उर्दू पी एच डी की सीट्स
जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। प्रदेश की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी में उर्दू विभाग के हालात खराब। राजस्थान यूनिवर्सिटी में उर्दू विभाग जो किसी ज़माने में उर्दू का जाना माना केंद्र माना जाता था आज यूनिवर्सिटी प्रशासन की लापरवाही से ख़ाली होता जा रहा है। हर साल उर्दू विभाग में रेगुलर एडमिशन के लिए जहाँ और विभागों की तरह प्रवेश परीक्षा होती थी लेकिन इस बार सिर्फ़ मेरिट बेस पर एडमिशन लेने की नोबत आ गई। इसकी वजह है उर्दू का गिरता स्तर और यूनिवर्सिटी प्रशासन की लापरवाही। एक रिपोर्ट के अनुसार उर्दू विभाग , राजस्थान कॉलेज , महारानी कॉलेज में सिर्फ़ एक ही स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर हैं , बाक़ी सब गेस्ट फैकल्टी से चल रहा है। यहाँ तक की पिछले साल एचओडी प्रोफेसर नसीरा बसरी के रिटायरमेंट के बाद संस्कृत विभाग के एचओडी राम सिंह चोहान को उर्दू विभाग का एचओडी बनाया गया। उर्दू विभाग के पास खुदका कोई प्रोफ़ेसर नहीं। जो एक असिस्टेंट प्रोफेसर हैं मुकेश बैरवा है। उनकी खुदकी अभी पीएचडी चल रही है और यूजीसी के अनुसार अनुभव की भी कमी है। इन तमाम कारणों से आज उर्दू विभाग का स्तर गिर गया। कोई पी एच डी की सीट्स नहीं। छात्र काफ़ी सालों से इंतज़ार में हैं और आगे भी यह इंतज़ार कम होता नज़र नहीं आ रहा। कब यहाँ सरकार और यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ़ से प्रोफ़ेसर की भर्ती होगी ? कब वह यहाँ पीएचडी करा पाएंगे ? यह सवाल उर्दू के छात्रों को काफ़ी सोचने पर मजबूर कर रहा है।
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