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RGHS पर सरकार का एक्शन, पूर्व पीडी शिप्रा विक्रम के खिलाफ जांच शुरू, डिपार्टमेंट ने 4 सदस्यों की कमेटी बनाई

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जयपुर। राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजना (RGHS) में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरजीएचएस में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पूर्व परियोजना निदेशक शिप्रा विक्रम को लेकर गड़बड़ी मिली है। राज्य सरकार ने उनके खिलाफ मिली शिकायतों की जांच शुरू करवा दी है। बताया जा रहा है कि पिछले साल उनके खिलाफ कई गंभीर आरोपों को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद अब मामले की आधिकारिक जांच के आदेश दिए गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक- सरकारी कर्मचारियों और करीब पेंशनधारियों को नि:शुल्क उपचार और दवा सहित स्वास्थ्य की विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए चलाई जा रही आरजीएचएस में हॉस्पिटल और डायग्नोस्टिक सेंटर को इंपैनल करना और इंपैनल लिस्ट से बाहर करना, इंपैनल सेंटरों पर अनियमितता के खिलाफ कार्रवाई करके रिकवरी निकालना और बाद में उस रिकवरी को माफ कर देना जैसी गंभीर अनियमितताएं करने की शिकायत हुई थी। जिसमें शिप्रा विक्रम लंबे समय तक पूर्व परियोजना निदेशक रही। इस दौरान RGHS में परियोजना अधिकारी रहीं और उनका जबरदस्त वर्चस्व रहा। बताया जाता है कि वे जब तक इस पद पर थीं, तब तक किसी भी सीनियर अधिकारी या कर्मचारी से सीधे बात तक नहीं करती थीं। इसे लेकर भी चिकित्सा और वित्त विभाग के कई अधिकारी काफी खफा थे।

इन अधिकारियों की बनाई कमेटी

मेडिकल हेल्थ डिपार्टमेंट ने शिप्रा विक्रम के खिलाफ जांच के लिए 4 सदस्यों की कमेटी बनाई है। इसका अध्यक्ष राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के सीईओ को बनाया है। जबकि संयुक्त शासन सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग, कार्यकारी निदेशक (वित्त) राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी और कार्यकारी निदेशक (आईटी) राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी को सदस्य बनाया है।

वित्त विभाग में बड़ा वर्चस्व, इसलिए रुकी थी जांच

सूत्रों के मुताबिक- परियोजना निदेशक रही शिप्रा विक्रम का वित्त विभाग में बड़ा वर्चस्व रहा है। इस कारण वित्त विभाग के ही एक तत्कालीन सीनियर ऑफिसर भी उनके खिलाफ इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं कर सके थे। जिसके चलते उन सीनियर अधिकारी की तरफ से तैयार की गई इंटरनल रिपोर्ट के आधार पर शिप्रा विक्रम के खिलाफ सरकार ने जांच करवाने का फैसला किया है।

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900 करोड़ से अधिक का घोटाला आया सामने

आरजीएचएस योजना के क्रियान्वयन का जिम्मा संभाल रहे अधिकारियों, सरकारी चिकित्सकों, निजी अस्पतालों, दवा विक्रेताओं और लाभान्वितों ने मिलकर 900 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला किया है। चार साल में हुआ यह घोटाला सामने आने के बाद सरकार ने योजना के क्रियान्वयन का जिम्मा संभाल रही अधिकारी शिप्रा विक्रम को पद से हटाने के साथ ही 200 से अधिक चिकित्सकों, दवा विक्रताओं और लाभान्वितों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाया है।

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