भारत के पहले संचार मंत्री थे रफी अहमद किदवई
24 अक्टूबर पुण्यतिथि पर विशेष…..
रफी अहमद किदवई एक महान राजनेता, भारतीय स्वतंत्रता कार्यकर्ता और एक समाजवादी थे, जिन्हें इस्लामी समाजवादी के रूप में भी जाना जाता है। इनका जन्म 18 फरवरी 1894 में उत्तरप्रदेश के बाराबंकी जिले के मसेली गांव में हुआ था। इनके पिता इम्तियाज अली एक समृद्ध जागीरदार थे, जिन्होंने सरकारी सेवा में प्रवेश करके समाज का नाम रोशन किया था। रफी अहमद किदवई ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने चाचा विलामत अली से ली थी जो कि पेशे से एक शिक्षक और राजनीतिक रूप से सक्रिय वकील थे। 12वीं तक वह बाराबंकी जिले में ही पढ़े और फिर इसके बाद मोहम्मद एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज अलीगढ़ चले गए। जहां पर उन्होंने सन 1918 में बीए के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने एलएलबी की डिग्री की दिशा में काम करना शुरू किया, लेकिन सन 1920- 21 में महात्मा गांधी के अखिल भारतीय आंदोलनों में भागीदारी के लिए जेल भेज दिए गए और वह एलएलबी कभी पूरी नहीं कर पाए सन। 1919 में रफी की शादी मजीद-अन-निशा से हुई थी। रफी अहमद किदवई राजनीति में भी काफी सक्रिय रहे। अलीगढ़ में मोहम्मद एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज में भाग लेने के बाद किदवई ने खिलाफत आंदोलन के माध्यम से राजनीति में प्रवेश किया। सन 1926 के चुनाव में केंद्रीय विधानसभा के लिए औध से स्वराज पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुने गए थे वह विधानसभा में स्वराज पार्टी के चीफ व्हीप बन गए। किदवई के राजनीतिक कौशल ने पार्टी में विवादित मुद्दों पर एकता बनाए रखने में मदद की। सन 1929 में किदवई विधानसभा में स्वराज पार्टी के सचिव चुने गए।मोतीलाल नेहरू के प्रति उनकी निष्ठा थी। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 19 दिसंबर 1919 को पूर्ण स्वराज की मांग की और महात्मा गांधी ने जनवरी 1930 में नागरिक अवज्ञा आंदोलन शुरू किया। कांग्रेस कार्यकारिणी समिति द्वारा पूर्ण स्वराज संकल्प के जवाब में किदवई ने केंद्रीय विधानसभा से इस्तीफा दे दिया और नागरिक अवज्ञा आंदोलन में कूद पड़े। भारत सरकार अधिनियम 1935 के पारित होने के बाद उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए एक पद संभाला। 1937 में प्रांतीय स्वायत्तता योजना के तहत आगरा और औध यूपी के संयुक्त प्रांतों में गोविंद बल्लभ पंत कैबिनेट में किदवई राजस्व और जेलों के मंत्री बने। अप्रैल 1946 में वह यूपी के गृह मंत्री भी बने। सन 1947 में भारत को ब्रिटिश राज से आजादी मिलने के बाद किदवई भारत के पहले संचार मंत्री बने। किदवई का निधन 24 अक्टूबर 1954 को 60 वर्ष की उम्र में हुआ।
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