प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास आयरन लेडी इंदिरा गांधी की बराबरी करने का मौका
- 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध में पाकिस्तान के दो टुकड़े पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कर दिए थे।
जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहला मौका है जब देश का हर जाति, वर्ग, मजहब का बच्चा–बच्चा मोदी जी के साथ खड़ा है और उत्सुकता से उनकी ओर देख रहा है कि दुश्मन देश पाकिस्तान को किस तरह सबक सिखाएंगे। मोदी पहलगाम में 28 भारतीय नागरिकों के मारे जाने के बाद बिहार की जनसभा में बोल भी चुके हैं कि दुश्मनों को ऐसा सबक सिखाया जाएगा जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। पाकिस्तान की ओर से बार-बार भारत में विशेष रूप से जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। पाकिस्तान कश्मीर के अलगाववादियों को ट्रेनिंग देता है और फंडिंग करता है। पाकिस्तान की हरकतें लगातार भारत के खिलाफ जारी हैं। पाकिस्तान भारत से चार युद्ध हार चुका है, फिर भी पाकिस्तान भारत में आतंकवाद फैलाने से बाज नहीं आ रहा है। पहलगाम में 28 लोगों की हत्या के बाद देश की जनता में आक्रोश बहुत ज्यादा है। देश की जनता मोदी जी पर भरोसा करती है कि मोदी देश के हिम्मत वाले और साहसी प्रधानमंत्री हैं, जो पाकिस्तान को सबक सिखा सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पद पर रहते हुए कई रिकॉर्ड कायम किए हैं। अब उनके पास देश की पूर्व प्रधानमंत्री और आयरन लेडी इंदिरा गांधी का रिकॉर्ड तोड़ने का भी मौका है। 1971 में पाकिस्तान ने भारत पर एक तरफा आक्रमण कर दिया था, उस समय भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं। इंदिरा गांधी को देश की निडर और साहसी महिला प्रधानमंत्री माना जाता है। उनकी सूझबूझ का ही नतीजा था कि पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए गए। पाकिस्तान के 93 हज़ार सैनिकों को भारतीय सेना के सामने समर्पण करना पड़ा था। पाकिस्तान से बांग्लादेश (पूर्वी पाकिस्तान) को अलग कर एक नया देश बना दिया गया। इस युद्ध में भारतीय सेना पाकिस्तान के काफी अंदर तक घुस गई थी और कब्जा कर लिया था, बाद में शांति समझौते के तहत पश्चिमी पाकिस्तान के जीते हुए भाग पूर्व प्रधानमंत्री एवं आयरन लेडी इंदिरा गांधी ने वापस कर दिए।
बांग्लादेश बनाने में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का योगदान
भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1971 के बाद भारत-पाकिस्तान युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाई जिसके परिणाम स्वरुप पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए और बांग्लादेश का निर्माण हुआ। उनका योगदान निम्नलिखित बिंदुओं में देखा जा सकता है
राजनीतिक नेतृत्व और रणनीति
इंदिरा गांधी ने पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए अत्याचारों और बंगाली आबादी के दमन के खिलाफ मजबूत रुख अपनाया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाया और भारत को नैतिक रूप से सही ठहराया।
मुक्ति वाहिनी का समर्थन
इंदिरा गांधी की सरकार ने बंगाली विद्रोहियों (मुक्तिवाहिनी) को सैन्य प्रशिक्षण हथियार और रसद सहायता प्रदान की, जिससे उनकी स्वतंत्रता की लड़ाई मजबूत हुई।
1971 युद्ध में निर्णायक कार्यवाही
जब पाकिस्तान ने 3 दिसंबर 1971 को भारत पर हमला किया, इंदिरा गांधी ने भारतीय सेना को त्वरित और प्रभावी जवाब देने का आदेश दिया। भारतीय सेना ने पूर्वी और पश्चिमी मोर्चे पर शानदार प्रदर्शन किया और मात्र 13 दिन में पाकिस्तानी सेना ने ढाका में आत्म समर्पण कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना
इंदिरा गांधी ने अमेरिका और चीन जैसे देशों के दबाव का डटकर मुकाबला किया, जो पाकिस्तान के समर्थक थे। सोवियत संघ के साथ 1971 की मित्रता संधि ने भारत को रणनीतिक लाभ दिलाया।
बांग्लादेश का उदय
युद्ध के बाद 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना के 93000 सैनिकों ने आत्म समर्पण किया और पूर्वी पाकिस्तान एक स्वतंत्र राष्ट्र, बांग्लादेश बन गया। यह इंदिरा गांधी की कूटनीतिक और सैन्य रणनीति की बड़ी जीत थी। इंदिरा गांधी की दृढ़ इच्छा शक्ति, राजनैतिक दूरदर्शिता और साहसिक नेतृत्व ने न केवल पाकिस्तान को विभाजित किया बल्कि दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति को मजबूत किया।
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