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NEET-JEE परीक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी:

जयपुर

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11वीं में एंट्रेंस और कोचिंग घंटों पर सीमा

12वीं के छात्र का AI टीचर भी बना चर्चा का विषय

देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव, कोचिंग कल्चर और डमी स्कूलों की समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार एक नए मॉडल पर विचार कर रही है।

इसी कड़ी में 11वीं कक्षा में ही NEET-JEE जैसे एंट्रेंस एग्जाम कराने का प्रस्ताव सामने आया है। इसके साथ ही कोचिंग संस्थानों के रोजाना घंटों को सीमित करने की भी योजना बनाई जा रही है। वहीं दूसरी ओर, तकनीक के क्षेत्र में एक 12वीं के छात्र द्वारा बनाया गया AI टीचर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

आइए जानते हैं शिक्षा और तकनीक से जुड़ी इन अहम खबरों के बारे में विस्तार से।

कक्षा 11वीं में ही NEET-JEE जैसे एंट्रेंस एग्जाम कराने की तैयारी

NEET और JEE की तैयारी के नाम पर छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार बड़े सुधारों पर विचार कर रही है।

  • प्रस्ताव: मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाएं कक्षा 11वीं में ही आयोजित की जाएं।

  • उद्देश्य: छात्रों को 12वीं के बोर्ड और एंट्रेंस एग्जाम का दोहरा बोझ एक साथ न झेलना पड़े।

इस मुद्दे पर हाल ही में एक केंद्रीय कमेटी की बैठक हुई, जिसमें शिक्षा विशेषज्ञों, प्रशासकों और नीति निर्माताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में यह माना गया कि मौजूदा सिस्टम में छात्र 9वीं या 10वीं से ही कोचिंग के दबाव में आ जाते हैं, जिससे पढ़ाई का संतुलन बिगड़ जाता है।

कोचिंग सेंटर के घंटों पर लगेगी लगाम

सरकार का मानना है कि कोचिंग सेंटरों पर अत्यधिक निर्भरता छात्रों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा रही है।

  • नई समय सीमा: कोचिंग संस्थानों के रोजाना पढ़ाने के घंटे 2 से 3 घंटे तक सीमित किए जाएं।

  • फायदा: छात्र स्कूल की पढ़ाई को प्राथमिकता देंगे और कोचिंग को सिर्फ सहायक माध्यम के रूप में देखेंगे। इससे डमी स्कूलों की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी रोक लगने की उम्मीद है।

NEET-JEE और बोर्ड परीक्षा का हाइब्रिड मॉडल

केंद्रीय पैनल ने NEET-JEE और बोर्ड परीक्षाओं को मिलाकर एक हाइब्रिड मूल्यांकन मॉडल पर भी सुझाव दिया है।

इस मॉडल में बोर्ड परीक्षा के अंकों और एंट्रेंस टेस्ट के स्कोर, दोनों को मिलाकर मेरिट तैयार की जा सकती है। इससे छात्रों को बार-बार परीक्षाओं की दौड़ से राहत मिलेगी और स्कूली शिक्षा की अहमियत भी बनी रहेगी।

डमी स्कूल और करियर काउंसलिंग पर चिंता

बैठक में कई अन्य गंभीर मुद्दों पर भी चर्चा हुई:

  • अलग-अलग बोर्डों के सिलेबस में अंतर।

  • डमी स्कूलों की समस्या।

  • कमजोर फॉर्मेटिव असेसमेंट सिस्टम।

  • स्कूलों में करियर काउंसलिंग की कमी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर छात्रों को समय रहते सही मार्गदर्शन मिले, तो वे बिना अनावश्यक दबाव के अपने करियर का चुनाव कर सकते हैं।

कक्षा 12वीं के छात्र का बनाया AI टीचर हुआ वायरल

जहाँ एक ओर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर एक छात्र ने तकनीक के ज़रिए शिक्षा को नया रूप देने की मिसाल पेश की है। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के शिव चरण इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले कक्षा 12वीं के छात्र आदित्य कुमार ने एक AI रोबोट टीचर तैयार किया है।

25 हजार रुपये में तैयार किया ‘सोफी’

आदित्य कुमार ने महज 25,000 रुपये की लागत से इस AI टीचर को तैयार किया है। इस रोबोट का नाम उन्होंने ‘सोफी’ रखा है।

  • वायरल वीडियो में सोफी छात्रों के सवालों के जवाब देती और बातचीत करती नजर आ रही है।

  • आदित्य ने यह AI टीचर अपने स्कूल के साइंस प्रोजेक्ट के लिए बनाया था।

  • उनका मकसद शिक्षा को आसान और रोचक बनाना है।

भविष्य में और अपग्रेड करने की योजना

आदित्य के मुताबिक, यह AI टीचर अभी शुरुआती स्तर पर है, लेकिन भविष्य में वे इसमें और फीचर्स जोड़ना चाहते हैं, जैसे:

  • अलग-अलग विषयों की जानकारी।

  • हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में संवाद।

  • छात्रों की जरूरत के अनुसार कंटेंट।

निष्कर्ष

एक तरफ सरकार शिक्षा प्रणाली को तनावमुक्त बनाने की दिशा में बड़े फैसलों की तैयारी कर रही है, तो दूसरी तरफ देश के युवा खुद शिक्षा के भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं। कक्षा 11वीं में NEET-JEE कराने का प्रस्ताव हो या कोचिंग घंटों की सीमा—ये सभी कदम छात्रों के हित में अहम साबित हो सकते हैं।

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