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मैं रहूं न रहूं, हमेशा साथ रहूंगा…प्रेमानंद जी महाराज का भावुक संदेश, भक्तों को संदेश देते हुए क्या इशारा कर गए?

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Premanand Maharaj Emotional Message : नई दिल्ली। प्रेमानंद महाराज  (Premanand Maharaj) आज देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में करोड़ों श्रद्धालुओं के बीच एक बड़े आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में जाने जाते हैं। सोशल मीडिया से लेकर अध्यात्म जगत तक उनके प्रवचन और विचार लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। उनके वीडियो हर दिन करोड़ों लोग सुनते हैं और उनसे प्रेरणा लेते हैं। लेकिन हाल ही में प्रेमानंद जी महाराज का एक ऐसा भावुक रूप सामने आया जिसने उनके भक्तों को भावविह्वल कर दिया। यह संदेश तब आया है जब महाराज जी का स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा है। भक्तों के कल्याण की चिंता में डूबे महाराज जी की आंखों से जब आंसू छलक पड़े, तो वहां मौजूद हर श्रद्धालु नि:शब्द रह गया।

स्वास्थ्य बिगड़ने पर आश्रम से जारी हुआ संदेश

दरअसल, पिछले कुछ समय से श्री प्रेमानंद जी महाराज की तबीयत खराब चल रही है। उनकी दोनों किडनियां पहले से ही खराब हैं, और हालिया स्वास्थ्य कारणों की वजह से उनकी नियमित पदयात्रा और दर्शन लाभ को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। महाराज जी के श्री कृष्ण शरणम आश्रम की ओर से भक्तों से विशेष अपील की गई है कि वे अभी उनके दर्शन के लिए वृंदावन न आएं और महाराज जी के स्वास्थ्य के लिए अपने-अपने घरों से ही प्रार्थना करें। इसी गंभीर स्थिति के बीच महाराज जी ने अपने आश्रम से ही भक्तों के नाम यह विशेष और भावुक वीडियो संदेश जारी किया है।

वीडिया में प्रेमानंद जी कहते है-

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बिल्कुल चिंता मत करो। हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं। अंतिम बात यही कि चिंता नहीं करनी। न ये चिंता करनी है कि कैसे हमारा उत्थान होगा। बिना बोले तुम्हारे दिमाग में हम होंगे।’

ये भावुक अपील वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज ने वीडियो जारी कर अपने शिष्यों और भक्तों से की। 1 मिनट 19 सेकेंड का वीडियो रविवार को केली कुंज आश्रम ट्रस्ट के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया।

प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा- देख लेना तुम वही करोगे, जो गुरुदेव कहेंगे। आप बिल्कुल निश्चिंत रहिएगा। जो जहां जिस सेवा में आए, उस सेवा में रहिएगा। खूब नाम जप करो। मंगल होगा। तुम्हारे गुरुदेव तुम्हारे दिमाग में बैठे रहेंगे। आप निर्भय, निश्चिंत, निशोक होकर भजन करो। हमारा जब मन होगा, तब हम बोल देंगे।

प्रेमानंद जी ने कहा- हम एकांतवास कर रहे हैं। एकांतवास आपके लिए है, हमारे लिए नहीं। हमारे लिए हम भजन नहीं कर रहे। हमारे लिए हमारा मौन नहीं है। हम आपको सही बताएं तो हमारा जो कुछ होना था, वो हो गया। जो कुछ हो रहा है, वह सब आपके लिए हो रहा है। खूब भजन करो, नाम जप करो, आश्रित रहो और सुखी रहो, प्रसन्न रहो।

17 मई से बंद हैं रात्रि पदयात्रा और एकांतिक दर्शन

दरअसल, 17 मई से महाराज की रात्रि पदयात्रा और एकांतिक दर्शन बंद हैं। शिष्यों ने बताया था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। प्रेमानंद महाराज लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और उन्हें सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस करानी पड़ती है। 17 मई की रात हजारों भक्त उनके दर्शन के लिए पहुंचे थे, लेकिन महाराज रोज की तरह तड़के 3 बजे पदयात्रा पर नहीं निकले। बाद में शिष्यों ने लाउडस्पीकर से घोषणा कर बताया कि स्वास्थ्य कारणों से पदयात्रा स्थगित की जा रही है। इससे भक्त मायूस होकर लौट गए। हालांकि तीन दिन पहले महाराज केली कुंज आश्रम से निकलकर वराह घाट स्थित अपने गुरु गोविंद शरण महाराज के दर्शन के लिए पहुंचे थे। सामान्य दिनों में उनकी पदयात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

प्रेमानंद जी की दोनों किडनी खराब हैं

आपको बता दें प्रेमानंद महाराज की दोनों किडनी खराब हैं। उनकी हफ्ते में 2-3 बार डायलिसिस होती है। 13 साल की उम्र में उन्होंने ब्रह्मचारी बनने का फैसला किया। शुरुआत में प्रेमानंद महाराज का नाम ‘आरयन ब्रह्मचारी’ रखा गया। काशी में उन्होंने करीब 15 महीने बिताए। उन्होंने गुरु गौरी शरण जी महाराज से गुरुदीक्षा ली। फिर वह मथुरा आ गए।

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