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प्रयागराज में परिवार के 4 लोगों की हत्या, बिस्तर से ढके शव, डिटर्जेंट से धोया फर्श, इसलिए किया तेल का इस्तेमाल…सामूहिक हत्याकांड की कहानी

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Mass Murder In Prayagraj : प्रयागराज। उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या का मामला सामने आया है। कारोबारी, उनकी पत्नी, बेटा-बेटी की हत्या की गई है। शव बंद घर और दुकान में मिले हैं। बाहर से ताला जड़ा था। अलग-अलग कमरों में सभी के शव खून से लथपथ मिले। करोड़ों रुपए की संपत्ति के लालच में हत्याकांड की आशंका है।

मंगलवार दोपहर घर से बदबू आने पर पड़ोसियों को शक हुआ। पड़ोसियों ने दरवाजा खटखटाया, आवाज लगाई। लेकिन, कोई जवाब नहीं मिला। तब पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस गेट तोड़कर अंदर पहुंची। एक कमरे में वीरेंद्र कुमार वैश्य (70), उनकी पत्नी अनीता (65) की लाश मिली। पास ही दूसरे कमरे में बेटी मीनाक्षी (40) की लाश पड़ी हुई थी। तीनों के सिर पर गहरे जख्म थे। आसपास काफी खून फैला था, जो सूख चुका था। बेटे अभिषेक (38) की लाश ग्राउंड फ्लोर पर बनी दुकान में मिली, जो बाहर से बंद थी। पहले अभिषेक के लापता होने की जानकारी आई थी। तब उसी पर शक गया था कि वह तीनों को मारकर फरार हो गया है। जिस कमरे में दंपती के शव मिले, वहां एक गत्ता पड़ा था। उस पर लिखा मिला, ‘बंटी, बबली और बहू ने मारा।’ अब परिवार में एक ही बेटा बचा है। वह धोखाधड़ी के केस में इस समय कौशांबी जेल में बंद है। वारदात साउथ मलाका में हीवेट रोड चौराहे की है।

परिवार में अब एक बेटा बचा, वो भी जेल में है

पुलिस ने बताया कि वीरेंद्र कुमार वैश्य साउथ मलाका चौराहा स्थित अपने घर में पत्नी, बेटी और बड़े बेटे के साथ रहते थे। छोटे बेटे अश्विनी को उन्होंने करीब 15 साल पहले संपत्ति से बेदखल कर दिया था। दो मंजिला मकान, नीचे 14 दुकानें वीरेंद्र कुमार वैश्य का हीवेट रोड चौराहे पर दो मंजिला मकान है। निचले हिस्से में 14 दुकानें हैं। 13 दुकानें किराए पर हैं। ऊपरी हिस्से में वह परिवार के साथ रहते थे। परिवार में पत्नी, बेटी-बेटे के अलावा एक छोटा बेटा अश्विनी था, जो कौशांबी जेल में बंद है। एक दुकान बेटी मीनाक्षी चलाती थी। वह गिफ्ट से जुड़े सामान बेचती थी। उसी दुकान पर वीरेंद्र वैश्य भी बैठा करते थे। बेटा अभिषेक फ्लोर क्लीनिंग के काम से जुड़ा था। मीनाक्षी और अभिषेक की शादी नहीं हुई थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतक व्यापारी के छोटे बेटे अश्विनी ने कीडगंज की रहने वाली रितु के साथ लिव-इन में रहने लगा। दोनों पर कई लोगों से धोखाधड़ी करने के आरोप में मुकदमे दर्ज हुए थे। इसी मामले में दोनों को जेल भेजा गया था। बाद में महिला को जमानत मिल गई, जबकि अश्विनी अभी भी जेल में बंद है।

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पुलिस ने घर का ताला तोड़कर निकाली लाशें

मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे पड़ोसियों ने घर से बदबू आने पर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि निचली मंजिल से ऊपर जाने का रास्ता खुला था, लेकिन ऊपरी मंजिल का गेट बाहर से बंद था। पुलिस ने ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया। अंदर एक कमरे में वीरेंद्र कुमार और उनकी पत्नी के शव पड़े मिले, जबकि दूसरे कमरे में उनकी बेटी मीनाक्षी का शव मिला। इसके बाद फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉड को मौके पर बुलाया गया। जांच के बाद पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। इसके बाद पुलिस ने पूरे मकान की तलाशी ली। घर के नीचे बनी दुकानों की जांच के दौरान ग्राउंड फ्लोर पर स्थित एक दुकान से एक और शव बरामद हुआ। बाद में उसकी पहचान परिवार के बेटे अभिषेक के रूप में हुई। सूचना पर पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र सिंह और एडिशनल सीपी लॉ एंड ऑर्डर डॉ. अजय पाल शर्मा भी मौके पर पहुंचे।

रविवार को आखिरी बार दिखे थे वीरेंद्र वैश्य

स्थानीय लोगों ने बताया कि वीरेंद्र कुमार वैश्य को आखिरी बार रविवार को देखा था। इसके बाद से न तो वह दिखाई दिए और न ही उनकी पत्नी और बेटी को किसी ने देखा। जिस दो मंजिला मकान में वारदात हुई, वह करीब 8,000 वर्गफुट क्षेत्रफल में बना हुआ है। संपत्ति की अनुमानित कीमत 10 से 15 करोड़ रुपए है। मौके पर पहुंचे रिश्तेदार अतिन केसरवानी ने कहा कि वीरेंद्र कुमार वैश्य उनके रिश्ते में फूफा लगते थे। परिवार का लोगों से ज्यादा मेलजोल नहीं था। वे अपने काम से ही मतलब रखते थे।

कमरे में लिखा मिला- ‘बंटी, बबली और बहू ने मारा’

एडिशनल सीपी लॉ एंड ऑर्डर डॉ. अजय पाल शर्मा ने बताया कि दुकान से मिला चौथा शव काफी फूल चुका है। परिजनों ने इसकी पहचान अभिषेक के रूप में की है। मौत के कारण की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। जिस दुकान से शव बरामद हुआ, उस पर बाहर से ताला लगा हुआ था। जांच के दौरान एक और अहम तथ्य सामने आया है। जिस कमरे में दंपति के शव मिले, वहां एक बोर्ड पर लिखा मिला, ‘बंटी, बबली और बहू ने मारा।’ पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बंटी-बबली और बहू कौन हैं। उनका इस मामले से क्या संबंध है।

सबूत मिटाने के लिए फर्श को धोया

पुलिस को इस सामूहिक हत्याकांड की प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस को आशंका है कि हत्यारों ने वारदात को अंजाम देने के बाद साक्ष्य मिटाने और घटना को छिपाने की कोशिश की है। इसी वजह से चारों शवों को रजाई और कंबल से ढक गया, ताकि शवों से उठने वाली दुर्गंध बाहर न फैल सके और हत्या का पता देर से चले। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि जिन कमरों में शव पड़े थे, वहां फर्श पर खून के धब्बों को वाशिंग पाउडर (डिटर्जेंट) से साफ करने की कोशिश की गई। आरोपियों ने पानी से खून धोने के बाद फर्श पर तेल का भी इस्तेमाल किया, जिससे खून के निशान पूरी तरह मिटाए जा सकें। हालांकि फोरेंसिक टीम को घटनास्थल से ऐसे कई साक्ष्य मिले हैं, जो वारदात की कहानी बयां कर रहे हैं। पुलिस ने संबंधित महिला की तलाश के लिए भी 5 टीमें लगा दी हैं। मामले के सभी पहलुओं की जांच की जारी है।

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