होली और माहे रमजान के जुम्मे के मौके पर हिन्दू-मुस्लिम भाईयों ने एक-दूसरे को दी बधाई व शुभकमानाएँ
रमजान के दूसरे जुम्मे की नमाज में मस्जिदों में उमड़ा नमाजियों का जनसमुह
होली और माहे रमजान के जुम्मे के मौके पर हिन्दू-मुस्लिम भाईयों ने एक-दूसरे को दी बधाई व शुभकमानाएँ
जोधपुर,(रॉयल पत्रिका)। रहमतों व बरकतों के महीने में जोधपुर की ईदगाह बड़ी मस्जिद सहित तमाम मस्जिदों व इबादतगाहों में रमजान के दूसरे जुम्मे की नमाज अदा की गई। हर मस्जिद में रमजान के दूसरे जुम्मे की नमाज अदा करने के लिये शहर ए जोधपुर के नमाजियों का जनसमुह उमड़ा कि मस्जिदों में लगाये शमियाने दिखने लगे। बड़ी ईदगाह मस्जिद के पेश इमाम व खतीब मौलाना मोहम्मद हुसैन अशरफी ने रमजान में जुम्मे के दिन व जुम्मे की नमाज की नेकियों के बारे में बताते हुए कहा कि इस्लाम की बुनियाद अल्लाह रब्बुल आलमीन ने पांच चीजों पर रखी है, जिनमें तौहीद (अल्लाह को एक मनाना, उसकी जात में किसी दूसरे को शरीक न करना एवं अल्लाह के नबी मुहम्मद सल्ललाहो अलैहि वसल्लम को आखिरी रसुल मनाना), नमाज (हर मुसलमान मर्द और औरत पर पांच वक्त की नमाज फर्ज है), रोजा (माहे रमजान में रोजे रखना), जकात (हर साहिबे निसाब यानि जिसके पास साढ़े सात तोला सोना या साढ़े बावन तोला चांदी या उसके बराबर रकम है तो अपने माल की जकात देना) व हज (जिन्दगी में एक बार करना, शर्त यह है कि हज पर जाने वाले के पास इतना पैसा होगा कि वह हज के दौरान रहन-सहन व आने जाने का खर्च उठा सके)। संस्थान प्रवक्ता शौकत अली लोहिया ने बताया कि आध्यात्मिक इस्लामी संस्थान दारूल उलूम इस्हाकिया मुफ्ती ए आजम राजस्थान मुफ्ती शेर मोहम्मद रिजवी ने कहा कि रमजान के जुम्मे को ईद जैसे माहौल में जुम्मे की नमाज को निहायत अदब ओ एहतराम (संजीदगी व शांति के साथ) के साथ अदा की गई। जुम्मे की नमाज को अदा करने के लिये नमाजियों ने सुबह जल्दी से ही तैयारियां शुरू कर दी। मस्जिदों व इबादतगाहों में नमाजियों के लिए इंतेजामिया कमेटियों द्वारा खास इन्तजाम किये गये। जालोरी गेट बडी ईदगाह, खेतानाड़ी ईदगाह, चीरघर स्थित मदरसा अशफाकिया मस्जिद, बम्बा बडी व छोटी मस्जिद, उदयमंदिर, आसन, नागौरी गेट, सिवांची गेट, लाखरान सहित सैकड़ों मस्जिदों में नमाजियों का जनसमुह देखने लायक था। अजान की आवाज के साथ ही नमाजी घरों व अपने-अपने काम-काज छोड़कर मस्जिद की ओर रूख कर लिया और देखते-देखते मस्जिदें नमाजियों से भर गई। बच्चियों ने घरों में अपनी वालिदा (माँ) तो बच्चों ने मस्जिदों में अपने वालिद (पिता) के साथ मस्जिद में नमाज अदा की और एक-दूसरे को रमजान के मुबारक महिने के दूसरे जुम्मा की गले लग मुबारकबाद पेश की। ईदगाह क्षेत्र के पास स्थित ब्रह्मबाग, सिंधी मोहल्ला, हाकम बाग व आस-पास के क्षेत्र में हिन्दू भाईयों द्वारा होली का पर्व रंगोत्सव भी बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। होली और माहे रमजान के जुम्मे के मौके पर हिन्दू-मुस्लिम भाईयों ने एक-दूसरे को बधाई व शुभकमानाएँ देकर आपसी भाईचारगी व सौहार्द की मिसाल पेश की। रमजान में जुम्मे की अहमियत – जुम्मे के दिन को छोटी ईद कहा जाता है और जुम्मे के दिन को सारे दिनों का सरदार कहा जाता है। जुम्मे के नमाज के दिन मुसलमान नहा धोकर, इत्र (खुशबु) लगाकर अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों से समय निकालकर नमाज अदा करने के बाद देश के लिए अमनो-चौन की दुआ करने व गरीबों, मिस्कीनों की मदद करने के साथ आपस में एक-दूसरे को मुबारकबाद देता है। रोजों की बड़ी अहमियत व फजीलत अहादीस में बताई गई है। रमजान का महीना आते ही रहमत के सारे दरवाजे खोल दिये जाते है और जहन्नुम के दरवाजों को बन्द कर दिया जाता है। शैतानों को जंजीरों में बांध दिया जाता है।
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