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उत्तराखंड और हिमाचल में कुदरत का कहर: बादल फटने और लैंडस्लाइड से तबाही

नई दिल्ली

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चमोली: 16 घंटे बाद मलबे से निकला जिंदा शख्स

नई दिल्ली। भारत का पर्वतीय क्षेत्र हिमालय प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन के लिए मशहूर है, लेकिन यही इलाका प्राकृतिक आपदाओं का सबसे ज्यादा शिकार भी बनता है। पिछले दिनों उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में हुई भारी बारिश, बादल फटने और लैंडस्लाइड ने एक बार फिर इसकी पुष्टि कर दी। इन घटनाओं ने न केवल सैकड़ों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया बल्कि बुनियादी ढांचे को भी गंभीर नुकसान पहुँचाया।

चमोली: 16 घंटे बाद मलबे से निकला जिंदा शख्स

उत्तराखंड के चमोली जिले के नंदनगर इलाके में 18 सितंबर की रात बादल फटा। तेज़ बारिश और भारी बहाव के कारण अचानक मलबा गांवों पर टूट पड़ा। इस आपदा में 14 लोग लापता हो गए और कई लोग मलबे में दब गए। राहत और बचाव कार्य रातभर जारी रहा। आश्चर्यजनक रूप से 16 घंटे बाद एक व्यक्ति को मलबे से जिंदा बाहर निकाला गया। यह घटना लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थी। इस इलाके में लगभग 200 लोग प्रभावित हुए हैं। 35 से ज्यादा मकान क्षतिग्रस्त हुए और कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ा। फिलहाल प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में राहत कार्य कर रही हैं।

मसूरी-देहरादून रोड पर संकट

भारी बारिश और भूस्खलन के कारण देहरादून-मसूरी रोड भी क्षतिग्रस्त हो गई है। इस रोड पर आए दिन लैंडस्लाइड की घटनाएं देखने को मिल रही हैं, जिससे आम लोगों और पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित हुई है। मसूरी में इस समय करीब 2 हजार टूरिस्ट मौजूद थे, जिन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है। प्रशासन की ओर से उन्हें हर संभव मदद उपलब्ध करवाई जा रही है।

हिमाचल में बादल फटा और लैंडस्लाइड

उत्तराखंड के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश भी इस बार मानसून की मार से अछूता नहीं रहा। किन्नौर जिले के थाच गांव में गुरुवार देर रात बादल फटा। तेज़ पानी और मलबे में दो गाड़ियां बह गईं। लोग घबराहट में रातों-रात घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों पर चले गए। इसी तरह, शिमला के एडवर्ड स्कूल के पास भी भूस्खलन हुआ। इस वजह से शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली सर्कुलर रोड बंद कर दी गई है। स्थिति को देखते हुए एडवर्ड स्कूल में दो दिनों की छुट्टी घोषित करनी पड़ी। वहीं कुमारसैन के करेवथी क्षेत्र में तीन मंजिला मकान जमीन में धंस गया।

बारिश से बढ़ता मौत का आंकड़ा

हिमाचल प्रदेश में इस साल बाढ़ और बारिश से अब तक 424 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य किस गंभीर आपदा से गुजर रहा है। सैकड़ों घर ढह चुके हैं, सड़कें टूट गई हैं और कई गांवों का संपर्क भी कट गया है।

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उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश पर भी असर

इस आपदा का असर सिर्फ उत्तराखंड और हिमाचल तक सीमित नहीं रहा। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में रिहंद बांध इस साल पांचवीं बार ओवरफ्लो हुआ है। इससे आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए। वहीं कौशांबी जिले में बिजली गिरने से दो महिलाओं की मौत हो गई। मध्य प्रदेश में भी बारिश का प्रभाव देखने को मिला। इस मानसून सीजन में यहां औसतन 1097.28 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य बारिश से 187.96 मिलीमीटर ज्यादा है। गुना जिले में सबसे ज्यादा 1651 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि खरगोन में सबसे कम 665.48 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

कुदरत का संदेश और सावधानी

इन घटनाओं से साफ है कि हिमालयी राज्यों में मानसून के दौरान आपदा का खतरा हमेशा बना रहता है। बादल फटना, लैंडस्लाइड और भूस्खलन यहां आम बात है। इसका कारण सिर्फ प्राकृतिक परिस्थितियां ही नहीं, बल्कि अनियंत्रित निर्माण कार्य और वनों की कटाई भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अब बादल फटने और अचानक बारिश की घटनाएं और भी तेज़ी से बढ़ रही हैं। सरकार और स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वे आपदा प्रबंधन के लिए पहले से ठोस तैयारी रखें। साथ ही, पर्वतीय इलाकों में निर्माण कार्यों पर सख्त नियंत्रण हो और लोगों को आपदा के समय सतर्क रहने की ट्रेनिंग दी जाए। उत्तराखंड और हिमाचल की ताजा घटनाएं एक बड़ी चेतावनी हैं। पहाड़ों की गोद में बसे गांव और शहर खूबसूरत तो हैं, लेकिन जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए ज़रूरी है कि सरकार, प्रशासन और आम लोग मिलकर इन इलाकों में सुरक्षित जीवन और विकास की दिशा में कदम बढ़ाएं। तभी कुदरत के इस कहर को कम किया जा सकता है और भविष्य में ऐसी त्रासदियों से बड़ी संख्या में जानें बचाई जा सकती हैं।

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