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बिहार विधानसभा में भाजपा को हराने की जिम्मेदारी मुसलमानों की होगी

जयपुर

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14 प्रतिशत और 2.5 प्रतिशत आबादी वाले बनेंगे मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री

18 प्रतिशत जनसंख्या वाला मुस्लिम समुदाय की हैसियत सिर्फ वोट बैंक की ही रहेगी

एम खान

(रॉयल पत्रिका)। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भाजपा को हराने की जिम्मेदारी मुसलमानों के ऊपर आ गई। जबकि 14 प्रतिशत आबादी वाले यादव समाज के तेजस्वी यादव जो राजद के लीडर हैं मुख्यमंत्री बनेंगे। इसी तरह 2.5 प्रतिशत कश्यप (निषाद/ मल्लाह) समाज के नेता मुकेश साहनी बिहार के उप मुख्यमंत्री बनेंगे। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बिहार की सत्ता संभालने का सपना देख रहे इंडिया गठबंधन के राजनीतिक दलों ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के पद चुनाव से पहले ही बांट लिए हैं। इंडिया गठबंधन को थोक के भाव वोट देने वाले मुस्लिम समाज के हिस्से में सिर्फ भाजपा को हराने की जिम्मेदारी दी है। फिर भी मुस्लिम समाज इंडिया गठबंधन के साथ खुश दिखाई दे रहा है। इंडिया गठबंधन ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में 35-40 टिकट दिए थे जबकि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में घटकर 29 टिकट ही दिए हैं। मुस्लिम समाज में राजनीतिक जागरूकता की कमी होने के कारण सभी विपक्षी राजनीतिक दल सिर्फ मुस्लिम वर्ग को वोट बैंक समझने लगे हैं। ज्यादातर विपक्षी दल मुसलमानों के वोट इसलिए लेना चाहते हैं कि भाजपा को सत्ता में आने से रोकना है। मुसलमानों में भाजपा का डर बिठाया जा रहा है। यह सही भी है कि भाजपा के 12 वर्ष के शासन में मुस्लिम समाज को हासिये पर धकेलने की कोशिश की गई है। मुसलमानों के बुनियादी पहचान को समाप्त करने की कोशिश हुई है। तीन तलाक, आरएनआरसी, एनआरसी, वक्फ एमेंडमेंट बिल, मदरसों एवं मस्जिदों पर बुलडोजर एवं मुस्लिम समाज का उत्पीड़न जैसी घटनाओं ने मुस्लिम समाज को भाजपा से काफी दूर कर दिया है। लेकिन विपक्षी राजनीतिक दल भाजपा और मुस्लिम वर्ग के बीच की दूरी का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं। मुस्लिम वोटरों के सहारे सत्ता में आने के बाद कांग्रेस, राजद एवं अन्य दल मुसलमानों के योगदान को भूल जाते हैं। उन्हें भाजपा का डर दिखाकर सरकारों और पार्टियों में उचित भागीदारी नहीं दी जाती है।

बिहार में मुसलमानों को कम टिकट दिए गए हैं-

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इंडिया गठबंधन ने मात्र 29 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं। जिनमें राजद ने 19, कांग्रेस ने 10 और सीपीआई (एमएल) ने 2 टिकट दिए हैं। पिछले बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में इंडिया गठबंधन ने 35-40 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए थे। इसी तरह एनडीए ने पिछली बार 12 से 15 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव में उतारे थे। लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मात्र 5 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए गए हैं। जिनमें जेडीयू ने 4 मुस्लिम उम्मीदवार एवं एलजीपी (पासवान) ने 1 मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट दिया है। जबकि भाजपा जो बिहार में 101 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है, एक भी मुस्लिम को उम्मीदवार नहीं बनाया है। बिहार प्रदेश में मुसलमानों की आबादी 18 प्रतिशत है। इसलिए मुसलमान की जनसंख्या के अनुसार बिहार विधानसभा में करीब 44 मुस्लिम विधायक जीतकर पहुंचने चाहिए लेकिन ऐसा होता नहीं है। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में करीब 23 मुस्लिम विधायक जीतकर आए थे।

एआईएमआईएम ने उतारे 24 उम्मीदवार-

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने 24 उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है। जिनमें से एक उम्मीदवार हिंदू राजपूत समाज से है। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में ओवैसी की पार्टी के पांच मुस्लिम उम्मीदवार जीत कर आए थे। ओवैसी की पार्टी से इंडिया और एनडीए किसी भी गठबंधन ने साथ चुनाव लड़ने का समझौता नहीं किया है। दोनों गठबंधन ओवैसी की पार्टी को सांप्रदायिक पार्टी मानते हैं। ओवैसी की पार्टी इस बार विधानसभा 2025 में अपनी ताकत दिखाने के लिए बेताब है। माना जा रहा है कि 10 सीटों पर ओवैसी के उम्मीदवार बढ़त बना सकते हैं। देश के मुसलमान ओवैसी की पार्टी का कम ही साथ देते हैं। लेकिन ओवैसी ने मुसलमानों को जिस प्रकार राजनीतिक रूप से जागरूक किया है उसे दूसरे राजनीतिक दलों में बेचैनी फैली हुई है। मुसलमान अब सरकार और राजनीति में भागीदारी की बात करने लगा है। मुस्लिम वर्ग अब भाजपा को हराने का अकेले ठेकेदार नहीं बना रहना चाहता है। इसलिए कहा जा सकता है कि इस बार का मुस्लिम बिहार में पहले से ज्यादा जागरूक होकर वोट कर सकता है। जो मुसलमानों के भविष्य को लेकर काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है।

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