मुसलमानों पर देश को बढ़ाने और बचाने की दोहरी जिम्मेदारी !
देश के विकास में योगदान की जिम्मेदारी
देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी
एम खान
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। देश के नेताओं और पार्टियों की बिना लक्ष्य की राजनीति ने देश को कमजोर किया है। देश में चुनाव विकास, शिक्षा एवं रोजगार के मुद्दों पर नहीं होकर मुसलमान, पाकिस्तान, मस्जिद, दरगाह, मंदिर, आतंकवाद जैसे मुद्दों पर होने लगे हैं।
देश की जनता समझ ही नहीं पा रही है कि देश को मजबूत और शक्तिशाली बनाने के लिए कौन सी पार्टी और कौन से नेताओं को चुनकर विधानसभा और संसद में भेजा जाए। कुछ पार्टियों के नेता चुनावी सभाओं में ऐसे भाषण देते हैं जिससे पूरे मुस्लिम वर्ग को सबसे बुरे इंसान और आतंकवादी ठहराया जा सके, हालांकि प्रत्यक्ष रूप से मुसलमान का नाम नहीं लिया जाता है क्योंकि झूठे आरोपों और भाषणों पर कानूनी कार्यवाही हो सकती है।
वर्तमान में बिगड़ा सामाजिक माहौल
वर्तमान में जाति समुदायों के बीच नफरत बढ़ी है। एक दूसरे को शक की नजरों से देखा जाने लगा है।
- देश में खबर आने लगी है कि एक विशेष समुदाय के लोगों को बाजारों में काम नहीं दिया जा रहा है।
- कहीं पर पूरी जाति का बहिष्कार कर दिया गया है।
देश के अंदर ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई जहां जातियों, धार्मिक प्रकृति को विषय बनाकर देश को चलाने की कोशिश की जा रही है। जबकि देश के युवाओं को अच्छी शिक्षा, रोजगार एवं सामाजिक एकता का पाठ पढ़ाने की जरूरत है।
देश के प्रति वफादारी और विकास में योगदान
सबसे पहले मुसलमानों को देश के विकास में योगदान और देश की एकता के लिए काम करने की जरूरत है। वैसे 1857 और 1947 के स्वतंत्रता संग्राम में मुसलमानों ने देश को स्वतंत्र करवाने में बड़ी कुर्बानियां दी है। आज देश स्वतंत्र है तो हम भी स्वतंत्र हैं। लेकिन वर्तमान में देश में शांति एवं भाईचारा कायम रखने में भी कुर्बानियां देनी पड़ेगी।
मुस्लिम युवाओं के लिए मार्गदर्शन
मुस्लिम समुदायों के बुद्धिजीवियों को युवाओं को समझाना पड़ेगा कि वह किसी के उकसावें में नहीं आए।
- हमको शिक्षा प्राप्त करने और अच्छा रोजगार प्राप्त कर देश की आर्थिक मजबूती के लिए काम करने की तरफ अग्रसर किया जाए। क्योंकि टकराव के रास्ते से देश की बर्बादी शुरू हो जाती है।
- भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान और चीन मुस्लिम युवाओं को गुप्त रूप से देश के प्रति वर्गलाने का काम कर सकते हैं, उनकी साजिशों से बचना काफी जरूरी है।
- मुस्लिम युवाओं को चाहिए कि वह ईमानदारी से शिक्षा प्राप्त करें, रोजगार प्राप्त करें और व्यवसाय करें।
- उकसावे की चीज से बचें या फिर कानून का साथ ले।
देश की वर्तमान स्थिति बताती है कि मुसलमानों को राजनीतिक रूप से जागरूक होकर अच्छी और देश की सोचने वाली सरकार चुनने में समाज के उन लोगों की सहायता कर सकते हैं जो देश को बचाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।
मुसलमानों पर दोहरी जिम्मेदारी
इसलिए कहां जा सकता है कि वर्तमान में मुसलमानों के ऊपर दोहरी जिम्मेदारी है:
- उन्हें देश में एकता, भाईचारे और शांति बनाने में अपना योगदान देना है।
- साथ में देश किस प्रकार दुनिया का अग्रणी देश बने, के लिए हमेशा कोशिश करते रहनी है।
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