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मुसलमान भारत में इस्लाम की शुरुआत से है और रहेंगा- भागवत

जयपुर

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क्या भागवत की बातों का हिंदुत्व के पैरोंकारों एवं संगठनों पर प्रभाव पड़ेगा जो आएदिन भारत के मुसलमानों को परेशान करने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं और मुसलमानों को विदेशों से आए हुए बताते हैं।

एम. खान

जयपुर (रॉयल पत्रिका)। आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने पर तीन दिवसीय आयोजन में संघ प्रमुख डॉक्टर मोहन भागवत ने एक प्रश्न  के उत्तर में जवाब दिया कि भारत में मुसलमान इस्लाम की शुरुआत से ही है और भविष्य में भी रहेंगे । भागवत का कहना है कि भारत में मुसलमानों के साथ रहने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने यह भी कहा कि हिंदुओं की कम से कम तीन बच्चे पैदा करना चाहिए।  जमीयत उलेमा हिन्द के सदर मौलाना अरशद मदनी ने मोहन भागवत के बयान का स्वागत करते हुए कहा है कि यह एक बड़ी बात है कि आरएसएस ने यह मान लिया है कि भारत में मुसलमान कहीं बाहर से नहीं आए और भारत के लोगों द्वारा ही इस्लाम अपनाया गया है। मोहन भागवत ने कहा कि भारत में हिंदू मुसलमानों को साथ रहने की आदत डालनी चाहिए। भागवत ने यह भी कहा कि हिंदुओं को सभी मस्जिदों में शिवलिंग नहीं ढूंढना चाहिए।

मोहन भागवत के बयान का क्या प्रभाव पड़ सकता है-

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत देश के सबसे बड़े हिंदू संगठन के प्रमुख है जिनकी राजनीतिक शाखा भाजपा देश में शासन कर रही है।  इसलिए मोहन भागवत का मुसलमानों  को लेकर बयान काफी महत्वपूर्ण माना जाएगा। मोहन भागवत के बयान का विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं और भाजपा के नेताओं पर कितना होगा यह भविष्य ही बताएगा।  पिछले दिनों हिंदू संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मुसलमानों  को लेकर विरोधी अभियान चला रहे हैं जैसे मस्जिदों में शिवलिंग ढूंढना, मस्जिदों के सामने  ढोल तासे डेक बजाना, मोब लिंचिंग करना, मुसलमानों  को दाढ़ी मूंछ रखने से रोकना, बुरखा  पहनने का विरोध करना, मुसलमानों  के कारोबार का बहिष्कार करना, मुस्लिम कर्मचारियों और अधिकारियों को टारगेट करना आदि।  अब क्या हिंदू संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता आरएसएस प्रमुख भागवत की बातों को मानेंगे और उन पर अमल करेंगे। असम और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रीयों की कार्यशेली भागवत के बयान के बाद बदलेगी? वैसे भागवत के बयान का हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं पर कितना असर रहेगा यह तो पता नहीं है लेकिन यह सच है कि भारत में रह रहे 30 करोड़ मुसलमानों को देश से बाहर नहीं भेजा जा सकता है।  देश की मजबूती के लिए देश में हिंदू मुस्लिम का साथ रहना जरूरी है।  यदि हिंदू संगठन यह सोच रखते हैं कि भारत से मुसलमानों  को बाहर भेजा जा सकता है, तो यह संभव नहीं लगता।  क्योंकि 30 करोड़ मुसलमानों  की संख्या इतनी बड़ी है कि न तो उन्हें कहीं भेजा जा सकता है और न ही कोई दूसरा देश उनको अपने यहां आने देगा। इसलिए मोहन भागवत का बयान वर्तमान में देश की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।

राजनीतिक प्रभाव-

देश की राजनीति में पहली बार ऐसा हो रहा है जब आरएसएस को सीधे तौर पर टारगेट किया जा रहा है।  विपक्ष के नेता कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी सीधे तौर पर आरएसएस को देश में नफरत फैलाने वाला, दलित, पिछड़े और मुस्लिम विरोधी संगठन बताते हैं।  राहुल गांधी देश के ऐसा नेता है जो बिना किसी डर के आरएसएस को देश को तोड़ने एवं कमजोर करने वाला संगठन बताते हैं। राहुल गांधी आरएसएस के विरोध में दलितो  और पिछड़ों को लामबंद कर रहे हैं। मुस्लिम भाजपा से पहले ही दूरी बना कर रख रहे हैं। हिंदू संगठन आए दिन मुस्लिम वर्ग को टारगेट करते रहते हैं। यदि देश में हिंदू मुस्लिम की राजनीति ऐसे ही चलती रहेगी तो आरएसएस से दूसरे वर्ग दूरी बना सकते हैं और आरएसएस की राजनीतिक शाखा भाजपा  कमजोर पड़ सकती है। जमीनी स्तर पर देखा जाए तो भाजपा पहले से कमजोर हो रही है।  भाजपा की बागडोर कुछ ही नेताओं के हाथ में है। भाजपा के सत्ता में नहीं रहने की स्थिति में विपक्ष आरएसएस को टारगेट कर सकता है।  इसलिए संघ की दूरगामी राजनीति हो सकती है कि भविष्य की तैयारी अभी से कि जाए। संघ अच्छी तरह जानता है कि भाजपा की हिंदू-मुस्लिम राजनीति लंबी नहीं चल सकती है।  इसलिए वर्तमान में चल रही हिंदू मुस्लिम और नफरत की राजनीति को कम किया जाना चाहिए। नफरत की राजनीति को कम करने के लिए संघ के इशारे पर भाजपा आगामी चुनाव में मुसलमानों  को टिकट देना शुरू कर सकती है।

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