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दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुसलमानों ने भाजपा से परहेज नहीं रखा

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  • – मुसलमानों ने आप,कांग्रेस, भाजपा एवं एमआईएम सबको वोट दिया
  • – यदि मुसलमान सिर्फ भाजपा को हराने के लिए वोट देता तो परिणाम कुछ और होते 
  • – मुसलमान समुदाय अब कथित सेक्युलर दलों के झांसे में नहीं आना चाहता है 

एम. खान

जयपुर,(रॉयल पत्रिका)। दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक बार स्पष्टरूप से यह बात निकलकर सामने आई कि मुसलमानों ने इस बार सिर्फ भाजपा को हराने के लिए वोट नहीं किया बल्कि उन कथित सेक्युलर राजनीतिक दलों को भी हराने का काम किया है जो भाजपा को मुस्लिम विरोधी बता कर मुसलमानों का वोट थोक के भाव में लेकर राजनीति करते हैं। यह कथित सेक्युलर दल कभी भी मुसलमानों के विकास, शिक्षा एवं रोजगार की बात नहीं करते हैं लेकिन वोट मुसलमानों के लेकर राजनीति करते हैं। दिल्ली में मुसलमानों ने भाजपा सहित सभी पार्टियों को वोट दिए। दिल्ली का मुसलमान कम ज्यादा सभी पार्टियों से नाराज दिखाई दिया। यही कारण है कि भाजपा के ज्यादातर उम्मीदवार मामूली अंतर से चुनाव जीतते दिखाई दिए। यदि दिल्ली का मुसलमान सिर्फ भाजपा को हराने के लिए वोट देता तो दिल्ली विधानसभा के परिणाम कुछ और होते। इसका सीधा सा मतलब है कि मुसलमान भी अब भाजपा को हराने के लक्ष्य से पीछे हटने लगा है।

मुस्तफाबाद विधानसभा सीट :-

दिल्ली की मुस्तफाबाद विधानसभा सीट जो मुस्लिम बाहुल्य सीट मानी जाती है। जहां 60% से ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं। लेकिन इस सीट से भाजपा के मोहन विष्ट ने जीत दर्ज की है। मोहन विष्ट को 85215 वोट मिले और मुस्लिम उम्मीदवार अली मेहंदी को करीब 68000 वोट मिले। यहां मुसलमानों ने एमआईएम, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी एवं भाजपा सभी पार्टियों के उम्मीदवारों को वोट दिए। इसी कारण भाजपा उम्मीदवार मोहन विष्ट को आसान जीत हासिल हो सकी। इसी तरह दिल्ली के मुसलमानों ने करीब-करीब सभी सीटों पर ऐसा ही व्यवहार किया है। दिल्ली के मुसलमानों ने देश की कथित से सेक्युलर पार्टियों को संदेश दिया है कि भाजपा को हराने का ठेका सिर्फ मुसलमानों का नहीं है। यदि  मुसलमानों का वोट लेना है तो उपनी शिक्षा, रोजगार एवं विकास की बात करनी होगी। यदि भाजपा भी मुसलमानों की शिक्षा, रोजगार एवं विकास की बात करेंगी तो मुसलमान भाजपा को भी वोट दे सकते हैं। देश का मुसलमान बार-बार कथित सेक्युलर दलों के झांसे में आकर भाजपा का विरोध शुरू कर देता है।  वैसे भी भाजपा देश में अपने पैठ देश में मजबूती से बना चुकी है। मुसलमानों को भाजपा का विरोध छोड़कर अपने समुदाय की शिक्षा, रोजगार एवं विकास पर फोकस करना चाहिए और जो दल मुसलमानों के विकास की बात करें उसे समर्थन की सोचनी चाहिए।

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