मुशायराः शायरा नैना नसीब की गजलें दिलों में उतरी
तलवारों से बच्चों के मुकद्दर नही बनते….
बारां (रॉयल पत्रिका)। 12 सितम्बर। गुरूवार की रात्रि डोल मेला रंगमंच पर अखिल भारतीय मुशायरें में शेर-ओ-शायरी के दौरान गजलों, व्यंग और कौमी एकता के मिसरों का श्रोताओं ने देर रात तक लुत्फ उठाया। मुशायरों को सुनने के लिए जिलेभर से श्रौता रंगमंच प्रांगण में पहुंचे। शायर इस्माईल नजर के बेहतरीन संचालन में हैदराबाद से आए आरिफ सैफी ने मुशायरें का आगाज करते हुए शायराना अंदाज में मौजूदा राजनीति पर तंज कसें तो बिजनौर के फाकिर अदीब ने आज के हालातों पर व्यंग्य किया। सैफी ने- दम है तो कुदरत से टकराकर दिखा, जितने जुगनू है हिमायती तेरे, उनसे कह- सूरज बनाकर तो दिखा….. तथा दबा के रखोगे जिस सब्र से खामोशी को वो जलजले की जुबां भी एकदिन बोलेगा जैसे मिसरे से जोरदार कटाक्ष किया। मंच की शान नैना नसीब ने गजल, मोहब्बत में फिर इक कहानी हुई है वो भोली सी लड़की अब सयानी हुई है…. से दर्शकों की दाद पाई तो तेरा भगवान जैसा है, खुदा मेरा भी वैसा है, यह है काशी के जैसा और वो काबे के जैसा है…. जैसे कोमी एकता के मिसरे में श्रौताओं को सम्मोहित किया। इस्माईल नजर के शेर लब्जों को सजा लेने से मन्जर नही बनते, हर कागजी पानी से समन्दर नही बनते। तलवार अगर मुफ्त मिलती हो तो मत लो, तलवारों से बच्चों के मुकद्दर नही बनते…. से श्रौताओं में जोश भरा। मिसम गोपालपुरी की गजल फूल चुभते है मेरे जिस्म में खारों की तरह…. तथा मोहन मुंतजिर ने शायरी में मां की महिमा के बखान को बखूबी जाहिर किया। जूनेद अख्तर, कुवंर जावेद, शायर साबिर, शायर समर, शफीउद्दीन राही, डॉ. ईमान असलम और कमर आबदी ने अपनी शायरी और उर्दु की मीठी जुबां में गजलें पढी। शायरों की इस जमात में शायर सज्जाद झंझट डायमण्ड बनकर उभरें। उन्होने अपने शेरों में हास्य का तड़का लगाते हुए- इतना तरसाया है शादी की तमन्ना नें मुझे, अब हर शख्स मुझे अपना ससुर लगता है…. से श्रौताओं को गुदगुदाया। मुशायरें में उर्दु की मीठी जबांन से अन्य शायरों ने भी अपने कलाम प्रस्तुत कियें। मुशायरें की अध्यक्षता पीटीआई अनवर अली ने की। कार्यक्रम की शुरूआत में सभी शायरों समेत अतिथि लियाकत अली, डॉ. सीमा मांगरोल, जाकिर मंसूरी, डॉ. असगर, अशरफ देशवाली, प्रो. शमशाद अहमद, शेख बहादुर, रईस फैजी, नासिर मिर्जा, शाहिद कुण्डी, रईस भाई, साजिद भाई, सलीम भाई शटर वाले, सलाम मंसूरी, माजिद सलीम, मन्नू पठान, शाहीद भाई, शाहिद इकबाल, जाकिर हुसैन, अब्दुल कदीर, पिन्कु भाई, शकूर भाई, रहीम भाई, साबिर हुसैन, अजहरउद्दीन, मजूर भाई, नदीम भाई आदि का मेलाध्यक्ष प्रतिनिधि पुरूषोत्तम नागर, प्रदीप विजयवर्गीय, यशवंत अर्जुन, परवेज खान, नरेन्द्र कुमार, शिवराज महावर और उवेश शेख ने माल्यापर्ण और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
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