रमजान में जकात की अदायगी और रोज़े के महत्व पर मुफ्ती सिकंदर-ए-आज़म का पैगाम
मोहम्मद अली पठान
चूरू, (रॉयल पत्रिका)। मदरसा मदीना-तुल-उलूम मोहल्ला तेलियान के मुफ्ती सिकंदर-ए-आज़म ने रमजान के महीने में जकात की अदायगी और रोज़े के महत्व पर महत्वपूर्ण बयान दिए। उन्होंने कहा कि रमजान में जकात की अदायगी के लिए आखिरी रोज़ का इंतजार न करें, बल्कि इसे पहले ही निकाल दें ताकि दूसरों के घरों की ईद खुशहाल हो सके। मुफ्ती सिकंदर-ए-आज़म ने यह भी कहा कि अगर आपके आसपास या रिश्तेदारी में कोई गरीब है, तो उसकी मदद करना आपकी जिम्मेदारी है और यह मदद इस तरह से होनी चाहिए कि एक हाथ से दिया जाए तो दूसरे हाथ को पता न चले। उन्होंने रमजान के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “रमजान का महीना अल्लाह का दिया हुआ एक बड़ा तोहफा है। यह समय आत्म-शुद्धि, इबादत, और समाज में एकता का होता है।” मुफ्ती ने हदीस और कुरान की रोशनी में बताया कि रमजान में किए गए अच्छे कामों का फल बहुत बढ़ा होता है, और यह हमें अपने गुनाहों से माफी पाने का अवसर भी देता है। मुफ्ती ने रमजान के महीने में रोज़ा रखने के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि रमजान में रोज़ा रखना एक इस्लामिक कर्तव्य है जो आत्म-संयम और अल्लाह के प्रति समर्पण को दर्शाता है। उन्होंने कुरान के नाजिल होने की घटना को याद करते हुए कहा कि रमजान का महीना विशेष रूप से पुण्य और बरकत का होता है।
रमजान में बच्चों के लिए रोज़े के बारे में सुझाव: मुफ्ती सिकंदर-ए-आज़म ने छोटे बच्चों के लिए भी रोज़े रखने के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों को इस्लामिक शिक्षा के तहत धीरे-धीरे रोज़ा रखने की आदत डाली जा सकती है, और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वे शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं। बच्चों को रोज़े के धार्मिक और नैतिक महत्व के बारे में भी शिक्षित किया जाना चाहिए। रमजान में समाजिक एकता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देने के लिए मुसलमानों को एक-दूसरे के साथ मिलकर इफ्तार और सेहरी का आयोजन करना चाहिए, जो आपसी रिश्तों को मजबूत करता है। इस रमजान, अपनी जिम्मेदारियों को समझें और अल्लाह की रहमत और बरकत का पूरा लाभ उठाएं।
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