मदर टेरेसा- एक महान आत्मा
5 सितंबर पुण्यतिथि पर विशेष….
मदर टेरेसा का जन्म मेसिडोनिया देश में 26 अगस्त 1910 को हुआ था। उनका असली नाम एगनेस गोकंशे बोजाशीयू था। वह एक क्रिश्चियन महिला थी। मदर टेरेसा 18 वर्ष की उम्र में नन बनकर कोलकाता आई थी, जहां इन्होंने झोपड़पट्टी में रह रहे गरीब लोगों वह कुष्ठ से पीड़ित लोगों का दुख अनुभव किया और उसके बाद उन्होंने सदा भारत में रहकर गरीब असहाय और पीड़ित लोगों की सेवा का संकल्प लिया। उन्होंने निर्मल हृदय वह मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की और समर्पित सिस्टर की एक बड़ी तादाद तैयार की। जिनके सहयोग से उन्होंने एक मां की तरह अपना सारा जीवन गरीब और बीमार लोगों की सेवा में लगा दिया। वह हमेशा खुद को ईश्वर की एक समर्पित सेवक मानती थी अपने महान कार्यों की वजह से मदर टेरेसा जल्द ही गरीबों असहाय पर बीमार लोगों के बीच मदर व मसीहा के रूप में प्रसिद्ध हो गई। मदर टेरेसा को “एक महिला एक मिशन” के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने दुनिया बदलने के लिए बहुत बड़ा कदम उठाया था। उन्होंने गरीबों की सेवा के लिए कई सारे अनाथालय व अस्पताल खोले जो आज भी गरीबों की सेवा में कार्यरत है मानव जाति की उत्कृष्ट सेवा के लिए मदर टेरेसा विश्व भर में ढेर सारे अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजी गई, उनमें से कुछ जैसे भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार, भारत रत्न पुरस्कार तथा विश्व पटल पर नोबेल शांति पुरस्कार तथा ईसाई समाज द्वारा संत की उपाधि से नवाजी गई। उनके द्वारा प्रारंभ की गई गरीबों असहाय लाचार वह बीमारों की सेवा से सेवा में आज 4000 के करीब सिस्टर, 300 सहयोगी संस्थाएं विश्व के 123 देशों में इस वृहत सामाजिक सेवा के कार्यों में लगे हुए हैं। इस महान आत्मा की गरीबों की सेवा करते-करते ही 5 सितंबर 1997 को मृत्यु हो गई। पोप जॉन पॉल द्वितीय ने उनके महान कार्यों को याद करते हुए रोम में 19 अक्टूबर 2003 को इन्हें “धन्य” घोषित किया।
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