वक़्फ़ संशोधन के खिलाफ राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन, सभी धर्मों के लोगों ने एकजुटता दिखाई
भरतपुर, (रॉयल पत्रिका)। वक़्फ़ बचाओ संघर्ष समिति, भरतपुर की ओर से वक़्फ़ अधिनियम 1995 में हाल ही में किए गए संशोधनों के विरोध में एक प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त जिला कलक्टर भरतपुर, धनश्याम शर्मा को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व समिति के अध्यक्ष हाजी असलम खान गौरी ने किया। ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए वक़्फ़ कानून को तानाशाही और अल्पसंख्यकों के हक़ों के खिलाफ बताया गया और इसे तुरंत निरस्त करने की मांग की गई। ज्ञापन सौंपने वालों में मुस्लिम समाज के प्रमुख धार्मिक और सामाजिक प्रतिनिधि शामिल थे। इनमें शाही इमाम जागा मस्जिद भरतपुर के मुफ्ती आबिद, ईदगाह मस्जिद के इमाम मौहम्मद, जमाअते इस्लामी हिंद भरतपुर के जिलाध्यक्ष मास्टर कमालुद्दीन, एडवोकेट महबूब खान (अध्यक्ष जामा मस्जिद वक़्फ़ कमेटी), शहर कांग्रेस कमेटी महामंत्री सईद खान, कलुआ खान, भारत मुक्ति मोर्चा के प्रतिनिधि हंसलाल और रामदयाल, इमरोज खान, भूपेन्द्र, तहसीन पेंटर, इशाक खान सहित विभिन्न समुदायों के लोग शामिल रहे। इस मौक़े पर वक्ताओं ने कहा कि नया वक़्फ़ कानून वक़्फ़ संपत्तियों के संरक्षण के बजाय उन्हें विवादों में झोंकने और समुदाय की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने की दिशा में एक कदम है। हाजी असलम खान गौरी ने कहा कि यह क़ानून वक़्फ़ संपत्तियों पर कब्ज़े को कानूनी जामा पहनाने की साज़िश है। हम इसे किसी सूरत में मंज़ूर नहीं करेंगे और लोकतांत्रिक तरीके से देशभर में विरोध दर्ज कराते रहेंगे।इमरोज, सचिव, वक़्फ़ बचाओ संघर्ष समिति ने बताया कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर राज्यभर में जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा और ज़रूरत पड़ी तो आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी।ज्ञापन में राष्ट्रपति से अपील की गई है कि वे इस संवेदनशील विषय पर हस्तक्षेप कर वक़्फ़ अधिनियम में किए गए जनविरोधी संशोधनों को निरस्त करें और अल्पसंख्यक समुदाय के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करें।
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