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फ़िलिस्तीन के समर्थन में विशाल प्रदर्शन

नई दिल्ली

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ग़ाज़ा पर इस्राइल के क़ब्ज़े की योजना की कड़ी निंदा, भारत सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग

नई दिल्ली (रॉयल पत्रिका)। अगस्त 2025 को राजधानी दिल्ली में ग़ाज़ा के साथ एकजुटता व्यक्त करने और क्षेत्र में इस्राइल की बर्बर आक्रामकता की निंदा करने के लिए जन्तर मंतर पर एक विशाल प्रदर्शन किया गया। प्रतिभागियों ने गहराई से चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि ग़ाज़ा पर इस्राइल का सैन्य अथवा राजनीतिक क़ब्ज़ा स्थापित करने का कोई भी प्रयास पहले से घिरे हुए इस क्षेत्र में चल रहे मानवीय संकट को और गहरा देगा।

दिल्ली और आस-पास के राज्यों से सैकड़ों लोग धर्म, विचारधारा और सामाजिक पृष्ठभूमि की सीमाओं से परे एकत्र हुए। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में आम नागरिक, छात्र, सामाजिक, धार्मिक,  राजनीतिक नेता तथा प्रमुख नागरिक समाज कार्यकर्ता शामिल हुए। विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पृष्ठभूमियों से लोगों की भागीदारी ने यह सशक्त संदेश दिया कि फ़िलिस्तीन के साथ एकजुटता केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के सभी शांति और न्याय प्रिय लोगों की साझा चिंता है। प्रदर्शन में वक्ताओं ने इस्राइल की बर्बर आक्रामकता की कड़ी निंदा करते हुए उसे लगातार जारी नरसंहार बताया। उन्हों ने कहा कि अक्टूबर 2023 से अब तक लगभग एक लाख फ़िलिस्तीनी, जिनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं, मारे जा चुके हैं, जबकि घरों, अस्पतालों, विद्यालयों और शरणार्थी शिविरों को योजनाबद्ध रूप से निशाना बनाया गया है। प्रदर्शनकारियों ने भूखमरी की भयावह स्थिति और ग़ाज़ा की स्वास्थ्य एवं स्वच्छता व्यवस्था के लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो जाने पर गंभीर चिंता जताई तथा चेतावनी दी कि यदि नाकेबंदी नहीं हटाई गई तो शीघ्र ही भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।

 

प्रदर्शनकारियों ने फ़िलिस्तीन पर पूर्व में जारी संयुक्त वक्तव्य में उठाई गई मांगों को दोहराया, जिसे भारत के प्रमुख मुस्लिम संगठनों और नागरिक समाज समूहों ने समर्थन दिया था।मांगें इस प्रकार हैं–

 

  1. अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विश्व शक्तियाँ निर्णायक कार्रवाई करें तथा तत्काल युद्ध विराम सुनिश्चित करें।
  2. तत्काल मानवीय गलियारों को खोला जाए ताकि भोजन, पानी, ईंधन और चिकित्सा सहायता ग़ाज़ा तक पहुँच सके।
  3. अंतरराष्ट्रीय समुदाय और भारत सरकार इस्राइल की कार्रवाइयों की निंदा करें तथा उसके साथ सभी सैन्य और रणनीतिक सहयोग समाप्त करें।
  4. विश्व शक्तियाँ और भारत सरकार, इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट का समर्थन करें और संयुक्त राष्ट्र महासभा की फ़िलिस्तीनी इलाक़ों से अवैध क़ब्ज़ा समाप्त कर स्वतंत्र, संप्रभु फ़िलिस्तीनी राज्यकी स्थापना के प्रस्ताव का अनुमोदन करें।
  5. भारत अपनी पुरानी परंपरा का पालन करते हुए पीड़ितों के साथ खड़ा हो और अवैध क़ब्ज़ा समाप्त करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का सक्रिय समर्थन करे।
  6. देशभर के नागरिक समाज और संस्थान जन-जागरूकता अभियान तेज़ करें, इस्राइली उत्पादों का बहिष्कार करें और शांतिपूर्ण एक जुटता गतिविधियाँ चलाएँ।

प्रदर्शन से मुस्लिम बहुल देशों से भी प्रबल अपील की गई कि वे इस्राइल और अमेरिका पर अधिकतम दबाव डालें ताकि रक्त पात रोका जा सके । प्रतिभागियों ने ज़ोर देकर कहा कि नरसंहार के सामने चुप्पी अस्वीकार्य है और सरकारों, संस्थाओं तथा व्यक्तियों को अपने नैतिक एवं संवैधानिक दायित्वों के अनुरूप कार्य करना चाहिए। इस विशाल विरोध प्रदर्शन को संबोधित करने वालों में प्रमुख थे – सैयद सआद तुल्लाह हुसैनी, अध्यक्ष, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद; मौलाना हकीमुद्दीन क़ासमी, महासचिव, जमीयत उलमा-ए-हिंद; प्रो. अपूर्वानंद, दिल्ली विश्वविद्यालय; प्रो. वी.के. त्रिपाठी; अधिवक्ता लाराजय सिंह, वरिष्ठ वकील, बंबई उच्चन्यायालय; निशासिद्दू, महासचिव, एनएफआईडब्ल्यू; मोहम्मदअदीब, पूर्व राज्य सभा सांसद; ज़ियाउद्दीन सिद्दीक़ी, अध्यक्ष, वहदत-ए-इस्लामी; रईसुद्दीन, राष्ट्रीय अध्यक्ष, वेल्फेयर पार्टी ऑफ इंडिया; मुफ़्तीअब्दुल रज़ाक़, जमीयतउलमा, दिल्ली; अब्दुलहफ़ीज़, अध्यक्ष, एसआईओ ऑफ़ इंडिया; शेख़ निज़ामुद्दीन, सहायक महासचिव, मिलीकाउंसिल; और मालिक मुअतसिम ख़ान, उपाध्यक्ष, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद। मोहम्मद सलमान, मीडिया सचिव जमाअत-ए-इस्लामी हिंद (केंद्र)

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