फेफड़ों में कैंसर के लक्षण: शरीर में दिखने वाले गंभीर संकेत
दुनिया भर में कैंसर आज एक गंभीर बीमारी के रूप में सामने आ चुका है। यह केवल किसी एक देश या समाज तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी दुनिया के लिए चुनौती बना हुआ है। कैंसर कई प्रकार का होता है, लेकिन फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) सबसे खतरनाक और तेजी से फैलने वाला माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह धूम्रपान और तंबाकू का सेवन है। विशेषज्ञों के अनुसार 10 में से लगभग 7 मामले धूम्रपान से ही जुड़े होते हैं। हालांकि, यह गैर-धूम्रपान करने वालों को भी हो सकता है। फेफड़ों का कैंसर धीरे-धीरे बढ़ता है और शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य बीमारियों जैसे खांसी, थकान या सांस लेने में दिक्कत से मिलते-जुलते होते हैं। यही वजह है कि लोग अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि शुरुआती पहचान से इसका इलाज आसान हो सकता है।
लगातार खांसी रहना
फेफड़ों के कैंसर का सबसे आम और शुरुआती लक्षण लगातार खांसी रहना है। अगर खांसी तीन हफ्तों से ज्यादा समय तक बनी रहे और दवाइयों से भी ठीक न हो रही हो, तो यह फेफड़ों के कैंसर का संकेत हो सकता है। खांसी के साथ बलगम आना। खून या खून की लकीरें दिखाई देना। खांसी का धीरे-धीरे बढ़ना।
सांस लेने में तकलीफ़ (Shortness of Breath)
यदि बिना किसी वजह के सांस फूलने लगे या थोड़े से काम करने पर ही थकान और सांस लेने में कठिनाई महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। फेफड़ों में ट्यूमर बनने से वायु मार्ग (Airways) ब्लॉक हो सकता है जिससे सांस लेने में परेशानी होती है।
सीने में दर्द (Chest Pain)
फेफड़ों का कैंसर होने पर मरीज को सीने में लगातार दर्द महसूस होता है। यह दर्द गहरी सांस लेने, खांसने या हंसने पर बढ़ सकता है। कई बार यह दर्द कंधों और पीठ तक भी फैल जाता है।
आवाज़ में बदलाव (Hoarseness)
अगर आवाज़ अचानक भारी या बैठने लगे और लंबे समय तक सामान्य न हो, तो यह भी कैंसर का संकेत हो सकता है। इसका कारण कैंसर की वजह से वोकल कॉर्ड पर दबाव पड़ना है।
बार-बार इन्फेक्शन होना
ब्रोंकाइटिस (Bronchitis) या निमोनिया जैसी फेफड़ों की बीमारियां अगर बार-बार हो रही हों और ठीक होने के बाद फिर से दोहराई जा रही हों, तो यह भी कैंसर का लक्षण हो सकता है।
वजन का अचानक कम होना
अगर बिना डाइटिंग किए या किसी वजह के बिना वजन तेजी से कम होने लगे तो इसे भी गंभीरता से लेना चाहिए। फेफड़ों के कैंसर में शरीर की कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा ऊर्जा खर्च करने लगती हैं जिससे वजन तेजी से घटता है।
थकान और कमजोरी (Fatigue)
लगातार थकान, आलस और कमजोरी महसूस होना भी एक बड़ा संकेत है। कैंसर कोशिकाएं शरीर की ऊर्जा को तेजी से खत्म करती हैं जिससे शरीर थका-थका सा लगता है।
हड्डियों और सिर में दर्द
अगर कैंसर फेफड़ों से बढ़कर शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे हड्डियों या दिमाग तक फैल जाए तो यह हड्डियों में तेज दर्द, सिरदर्द और कभी-कभी दौरे (Seizures) का कारण भी बन सकता है।
चेहरे और गर्दन पर सूजन
फेफड़ों के कैंसर के कारण मुख्य नसों पर दबाव पड़ सकता है जिससे खून का बहाव बाधित होता है और चेहरे, गर्दन या बाहों में सूजन आ सकती है।
खून की कमी (Anemia)
कैंसर कोशिकाओं के कारण शरीर में खून की कमी हो सकती है। इसके चलते चक्कर आना, चेहरा पीला पड़ना और कमजोरी महसूस होना सामान्य है।
भूख न लगना
फेफड़ों का कैंसर होने पर कई मरीजों को भूख कम लगती है। खाना खाने में अरुचि और पेट जल्दी भरने जैसा महसूस होना भी इसके लक्षण हैं।
किन्हें ज्यादा खतरा होता है?
लंबे समय से धूम्रपान करने वाले लोग। पैसिव स्मोकिंग यानी दूसरों के धुएं के संपर्क में आने वाले। प्रदूषण और जहरीले धुएं में काम करने वाले लोग। जिनके परिवार में पहले फेफड़ों के कैंसर के केस रहे हों। रेडॉन गैस और एस्बेस्टस जैसे रसायनों के संपर्क में आने वाले लोग।
कब करें डॉक्टर से संपर्क?
अगर ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी 2-3 हफ्तों से ज्यादा समय तक बना रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। शुरुआती स्टेज में इसका इलाज संभव है लेकिन देर होने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।
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